मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के सभी स्कूलों और कॉलेजों में एक विशेष बाल‑सुरक्षा समिति की स्थापना का आदेश दिया है। यह समिति पुलिस, जिला प्रशासन और माता‑पिता के प्रतिनिधियों को शामिल करेगी ताकि छात्रों की सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत हो सके।

  • उच्च न्यायालय ने राज्य‑व्यापी बाल‑सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश दिया।
  • समिति में पुलिस, जिला प्रशासन, बाल‑संरक्षण अधिकारी और माता‑पिता शामिल होंगे।
  • शिक्षा विभाग को रिपोर्टिंग एवं जागरूकता कार्यक्रमों की अनिवार्य रूप से व्यवस्था करनी है।

मद्रास उच्च न्यायालय की एक डिवीजन बेंच ने 4 सितंबर, 2026 को दायर एक सार्वजनिक हित याचिका के जवाब में तमिलनाडु के सभी शैक्षणिक संस्थानों में एक विशेष बाल‑सुरक्षा समिति की स्थापना का आदेश दिया। यह निर्णय शिक्षा, पुलिस और बाल‑संरक्षण विभागों के बीच सहयोग को मजबूती देने के उद्देश्य से लिया गया है।

पेटीशन दायर करने वाले सी. सेलकुमार ने कहा कि 2025 में मद्रास के एक निजी उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षक द्वारा छात्रा पर यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद यह कदम अनिवार्य हो गया। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में अक्सर शिकायतों को आंतरिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया में ही समेट लिया जाता है, जिससे पीड़ित को न्याय नहीं मिलता।

समिति के गठन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकायतें तुरंत पुलिस और बाल‑संरक्षण अधिकारियों तक पहुँचें, और छात्रों को बिना डर के अपनी शिकायतें दर्ज करने का सुरक्षित माध्यम मिले। इसके अलावा, समिति नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाएगी और परामर्श तथा मनोवैज्ञानिक सहायता की उपलब्धता का ऑडिट करेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बाल‑सुरक्षा के लिए कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रावधान हैं, जैसे कि बाल संरक्षण अधिनियम, 2011 और शैक्षणिक संस्थानों में छात्र सहायता कार्यक्रम। परंतु इन प्रावधानों को लागू करने में अक्सर संस्थागत बाधाएँ और जागरूकता की कमी प्रमुख कारण रही है। मद्रास का यह आदेश उन चुनौतियों को दूर करने का एक नया प्रयास है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, राज्य‑व्यापी बाल‑सुरक्षा समिति से न केवल शैक्षणिक संस्थानों में उत्पीड़न के मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा के प्रति सार्वजनिक विश्वास भी मजबूत होगा। यह कदम अन्य राज्यों को भी समान पहल करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

"समिति का गठन शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाता है, जो बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।"
Did You Know?: 2019 में भारत में बाल‑सुरक्षा के लिए 1,500 से अधिक स्कूलों ने स्वैच्छिक रूप से बाल‑सुरक्षा समितियाँ स्थापित की थीं, परंतु उनमें से 70% की रिपोर्टिंग तंत्र अभी भी अधूरी थी।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या यह समिति केवल सरकारी स्कूलों पर लागू होगी?

A1: नहीं, यह आदेश सरकारी, सरकारी‑सहायता प्राप्त और निजी दोनों प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होता है।

Q2: समिति की रिपोर्टिंग का समय सीमा क्या है?

A2: समिति को हर छह महीने में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके शिक्षा विभाग को सौंपनी होगी।