पेशाब के बाद लगातार बूंदें टपकना, जिसे पोस्ट मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग कहते हैं, अब 30-40 वर्ष के पुरुषों में भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह समस्या अक्सर पेल्विक फ्लोर की कमजोरी या प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के कारण होती है, पर जरूरी नहीं कि यह कैंसर का संकेत हो।

  • पेशाब के बाद टपकना आमतौर पर पेल्विक फ्लोर की कमजोरी से होता है।
  • यह लक्षण प्रोस्टेट बढ़ने के साथ भी जुड़ सकता है, पर कैंसर का सीधा संकेत नहीं।
  • समय पर जांच और जीवनशैली सुधार से समस्या नियंत्रित की जा सकती है।

पेशाब करने के बाद लगातार बूंदें टपकना, जिसे चिकित्सा शब्दों में पोस्ट मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग कहा जाता है, एक ऐसी समस्या है जो पुरुषों के लिए अक्सर शर्म और असुविधा का कारण बनती है। इस लक्षण की रिपोर्ट 30-40 वर्ष के पुरुषों में भी बढ़ रही है, जबकि पहले यह केवल बुजुर्गों में आम माना जाता था।

डॉ. वैभव तिवारी, सिर गंगराम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख, ने बताया कि यह समस्या मुख्यतः पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होती है। जब पेशाब के बाद यूरेथ्रा में कुछ मूत्र रह जाता है, तो वह धीरे-धीरे टपकता है।

इसके अलावा, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना भी इस लक्षण का कारण बन सकता है। उम्र के साथ डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे प्रोस्टेट की कोशिकाएँ बढ़ती हैं। मोटापा, डायबिटीज और खराब जीवनशैली वाले पुरुषों में यह जोखिम और बढ़ जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पुरुषों के स्वास्थ्य पर इस लक्षण की अनदेखी से आगे चलकर गंभीर समस्याएँ, जैसे मूत्र पथ संक्रमण या प्रोस्टेट कैंसर, हो सकती हैं। समय पर पहचान और उपचार से इन जटिलताओं से बचा जा सकता है।

“क्लिनिकल अनुभव से पता चलता है कि अधिकांश मामलों में यह केवल पेल्विक फ्लोर की कमजोरी है, पर यदि साथ में अन्य लक्षण हों तो तुरंत जांच करनी चाहिए।” – डॉ. रोहित कपूर, ऑन्कोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल।
Did You Know?: पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़, जैसे केगल, पुरुषों में इस लक्षण को 30% तक घटा सकती हैं।

Frequently Asked Questions

क्या यह लक्षण प्रोस्टेट कैंसर का संकेत है? सामान्यतः यह केवल पेल्विक फ्लोर की कमजोरी या प्रोस्टेट बढ़ने के कारण होता है, पर यदि अन्य लक्षण भी हों तो जांच आवश्यक है।

इसका इलाज कैसे करें? जीवनशैली में बदलाव, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़, और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाएँ या सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।