बॉस्टन के संघीय न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने राष्ट्रपति ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी डाक मतदान नियम को रोका, यह कहते हुए कि यह नियम संविधान का उल्लंघन करता है और चुनावी प्रक्रियाओं में अराजकता पैदा करेगा।
- डाक मतदान नियम को तत्काल लागू होने से रोका गया
- न्यायालय का तर्क: केवल कांग्रेस के कानून ही चुनाव नियम तय कर सकते हैं
- वोटिंग अधिकार समूहों को मार्गदर्शन देने में असमर्थता का डर बढ़ा
बॉस्टन स्थित यू.एस. जिला न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने 4 सितंबर 2026 को एक नया अस्थायी प्रतिबंध जारी किया, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रशासन द्वारा जारी डाक मतदान नियम को लागू होने से रोका गया। यह नियम चुनावों के लिए आवश्यक समय सीमा को कड़ा करता और मतपत्रों पर अनोखे बारकोड की माँग करता।
क़ानूनी पृष्ठभूमि
कांग्रेस ने कभी भी मतदान अधिकारों पर डाक सेवा को अधिकार नहीं दिया है। तलवानी ने कहा कि यह नियम कांग्रेस के वैधानिक ढांचे के साथ टकराव में है और असंवैधानिक है। 29 राज्यों ने बिना किसी कारण के डाक मतदान की अनुमति दी है, जबकि 8 राज्य पूरी तरह से मेल-इन चुनाव करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यदि यह नियम लागू होता, तो चुनावी अधिकारियों को केवल कुछ हफ़्तों में अपने सिस्टम को बदलना पड़ता, जिससे मतदाताओं का बहिष्कार संभव हो जाता। यह निर्णय चुनावी लोकतंत्र की स्थिरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
"इस प्रकार के नियम से मतदाता अधिकारों पर गंभीर असर पड़ेगा, और चुनावी प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ेगी," कहते हैं मतदान विशेषज्ञ डॉ. अंजली पाटिल।
Did You Know?
Frequently Asked Questions
1. क्या डाक मतदान नियम अब भी लागू है? अभी के लिए, यह नियम अस्थायी रूप से रोका गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतज़ार है।
2. क्या यह निर्णय भविष्य के चुनावों को प्रभावित करेगा? हाँ, यह निर्णय आने वाले चुनावों में डाक मतदान के नियमों पर स्पष्टता और स्थिरता लाने की दिशा में एक कदम है।