पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवाद गहरा गया है। कैबिनेट ने राज्य की राय न मिलने तक नियुक्ति और शपथ ग्रहण को रोकने की मांग की है, जबकि केंद्र ने प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह संघर्ष संघीय व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाता है।

  • पंजाब कैबिनेट ने नई नियुक्ति को रोकने का निर्णय लिया है।
  • केंद्र सरकार ने प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नियुक्ति जारी रखी।
  • यह विवाद संघीय व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों पर गहरा सवाल उठाता है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस, अश्वनी कुमार मिश्रा, की नियुक्ति पर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच तनाव बढ़ गया है। 6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस नियुक्ति की सिफारिश की, जिसके बाद 12 अगस्त को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने राज्य सरकार से राय मांगी। परंतु 5 सितंबर को केंद्रीय मंत्रालय ने बिना राज्य की सहमति के नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कैबिनेट की बैठक में इस निर्णय के खिलाफ आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि यह "मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर" के पैरा‑6 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है। कैबिनेट ने कहा कि राज्य की राय न मिलने पर नियुक्ति और शपथ ग्रहण को रोकने की मांग है।

केंद्र सरकार का दावा है कि नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई उल्लंघन नहीं हुआ, और यह कि सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने सामान्य प्रोटोकॉल का पालन किया। दूसरी ओर, पंजाब सरकार ने इस कदम को संवैधानिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था पर आक्रमण बताया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विवाद सिर्फ एक नामित पद के लिए नहीं, बल्कि भारत की संघीय संरचना और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गहरा असर डालता है। यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ तो यह अन्य राज्यों के साथ केंद्रीय सरकार के संबंधों में भी खिंचाव पैदा कर सकता है।

"न्यायपालिका की नियुक्तियों में राज्य की सहमति अनिवार्य है; इसका उल्लंघन संघीय संतुलन को खतरे में डालता है," कहते हैं वरिष्ठ वकील एवं न्यायिक विश्लेषक डॉ. राजेश कुमार।

राज्य सरकार ने इस विवाद को पहले से चल रहे अन्य मुद्दों से भी जोड़ते हुए, जैसे ग्रामीण विकास निधि का बकाया और बाढ़ राहत पैकेज, केंद्र पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। यह व्यापक राजनीतिक संघर्ष के बीच न्यायपालिका के फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है।

Did You Know?: भारत में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश के बाद राज्य सरकार की राय अनिवार्य होती है, जो केवल 30 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए।

Frequently Asked Questions

1. क्या अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति पूरी तरह वैध है? वर्तमान में, यह विवाद के कारण वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, और नियुक्ति को रोकने की मांग जारी है।

2. यदि विवाद का समाधान नहीं हुआ तो क्या होगा? यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है या फिर यह मुद्दा उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में सुलझाया जा सकता है।