सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे के बाद घायल छात्रों के परिजनों और दोस्तों ने AIIMS ट्रॉमा सेंटर के बाहर घंटों इंतजार किया। मलबे से निकाले गए छात्रों की गंभीर स्थिति ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
- सत्य निकेतन भवन हादसे में कई छात्र घायल हुए हैं, जिन्हें AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
- घायल छात्रों के परिजनों को वार्ड के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे बाहर भारी तनाव है।
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अस्पताल का दौरा कर घायलों के उपचार का जायजा लिया।
नई दिल्ली: रविवार, 6 सितंबर 2026 को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक भवन हादसे के बाद AIIMS ट्रॉमा सेंटर के बाहर का दृश्य अत्यंत हृदयविदारक रहा। मलबे से निकाले गए छात्र-छात्राओं के दोस्त और रिश्तेदार अस्पताल के बाहर अनिश्चितता और डर के साये में घंटों इंतजार करते नजर आए। आपातकालीन वार्ड में प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण परिजन अपने प्रियजनों की स्थिति जानने के लिए छटपटाते रहे।
छात्रों की स्थिति और परिवारों का दर्द
हादसे की चपेट में आए छात्रों में से एक, अभिषेक, जो मोतीलाल नेहरू कॉलेज के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं, उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। उनके मित्र कृष ने बताया कि अभिषेक को मलबे से निकालने के बाद अस्पताल लाया गया, लेकिन उनकी हालत देखकर वह स्तब्ध रह गए। कृष ने यह भी खुलासा किया कि जिस पीजी (PG) में अभिषेक रहते थे, वहां की स्थिति बेहद दयनीय और भीड़भाड़ वाली थी, जिसमें पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था।
एक अन्य छात्र अनिरुद्ध के चाचा जसराज ने बताया कि उत्तर प्रदेश से सूचना मिलते ही वे दिल्ली पहुंचे। हालांकि अनिरुद्ध की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है, लेकिन अस्पताल के भीतर अन्य 10-12 घायल छात्रों की मौजूदगी ने बाहर मौजूद लोगों की बेचैनी को और बढ़ा दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली के छात्र आवास क्षेत्रों, विशेषकर सत्य निकेतन जैसे इलाकों में अनियंत्रित निर्माण और बुनियादी ढांचे की अनदेखी एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। छात्रों के रहने की खराब स्थिति और असुरक्षित भवनों का यह मामला शहरी नियोजन की विफलता को उजागर करता है।
असुरक्षित पीजी और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले आवास छात्रों के जीवन के लिए एक अदृश्य खतरा बने हुए हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दिल्ली के छात्र क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण और 'हाउसिंग संकट' की समस्या दशकों पुरानी है। पिछले कुछ वर्षों में, छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण पीजी और हॉस्टल के नाम पर अवैध रूप से बनाए गए कमरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो अक्सर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: घायल छात्रों का इलाज कहाँ चल रहा है?
उत्तर: सभी गंभीर रूप से घायल छात्रों का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर में किया जा रहा है।
प्रश्न 2: क्या प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है?
उत्तर: मुख्यमंत्री के दौरे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं।