अस्पतालों में स्थापित MRI स्कैनर को कभी बंद नहीं किया जाता क्योंकि इनके सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को लगातार -269 °C पर ठंडा रखना पड़ता है। यह ठंडा करने का काम लिक्विड हीलियम से होता है, और बंद‑खोलने की प्रक्रिया में करोड़ों खर्च आते हैं।
- MRI स्कैनर में सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट होते हैं
- इनको निरंतर -269 °C पर लिक्विड हीलियम से ठंडा रखना आवश्यक है
- बंद‑खोलने की प्रक्रिया में 30,000‑40,000 डॉलर तक खर्च आता है
भारत के बड़े अस्पतालों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में स्थापित MRI (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) मशीनें एक बार चालू होने के बाद कभी बंद नहीं की जातीं। यह सिर्फ़ सुविधा नहीं, बल्कि तकनीकी और आर्थिक कारणों से अनिवार्य है।
MRI की मुख्य शक्ति उसके सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट से आती है, जो लगभग शून्य के निकट तापमान, यानी -269 °C (एब्सोल्यूट ज़ीरो) पर कार्य करता है। इस अत्यंत कम तापमान को बनाए रखने के लिए लिक्विड हीलियम का उपयोग किया जाता है, जो एक विशेष क्रायोजेनिक सर्कुलेशन सिस्टम द्वारा निरंतर प्रवाहित किया जाता है।
लिक्विड हीलियम की कमी और उसकी कीमत में रिकॉर्ड उछाल के कारण, MRI को बंद करके फिर से चालू करने की प्रक्रिया अत्यधिक महंगी पड़ती है। एक बार शट‑डाउन करने पर, मैग्नेट को धीरे‑धीरे ‘रैंप‑डाउन’ करना पड़ता है, जिससे हीलियम का नुकसान न्यूनतम रहता है, लेकिन इस प्रक्रिया में 30,000 से 40,000 डॉलर तक खर्च हो सकता है।
शट‑डाउन के दौरान मैग्नेटिक क्षेत्र को सुरक्षित रूप से समाप्त करना आवश्यक होता है, क्योंकि अचानक बंद करने से उपकरण के संवेदनशील घटकों को नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए तकनीशियन विशेष ‘मैग्नेट पावर सप्लाई’ उपकरण का उपयोग करके करंट को क्रमशः हटाते हैं, जिससे हीलियम संरक्षित रहता है।
आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। हीलियम का वैश्विक बाजार सीमित है और इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। एक बार हीलियम समाप्त हो जाने पर, नई आपूर्ति प्राप्त करना कठिन और महंगा हो जाता है, जिससे अस्पतालों को लगातार चलाने का विकल्प अपनाना पड़ता है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी MRI को लगातार चालू रखना बेहतर माना जाता है। निरंतर ठंडा रखे गए मैग्नेट में कोई अचानक परिवर्तन नहीं होता, जिससे रोगियों और स्टाफ दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पहला व्यावसायिक MRI स्कैनर 1970 के दशक में विकसित हुआ था, जब सुपरकंडक्टिंग तकनीक अभी शुरुआती चरण में थी। तब से ही लिक्विड हीलियम को ठंडक के स्रोत के रूप में अपनाया गया, और आज तक इस प्रणाली में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the uninterrupted operation of MRI scanners not only safeguards costly medical infrastructure but also ensures consistent diagnostic availability across India's rapidly expanding healthcare network.
डॉ. आयशा खान, वरिष्ठ रेडियोलॉजी इंजीनियर: "एक सुपरकंडक्टिंग MRI को बंद करना ऐसा है जैसे दिल की सर्जरी के बीच में बंधना; जोखिम लाभ से कहीं अधिक होते हैं।"
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या MRI मैग्नेट को साधारण स्विच से बंद नहीं किया जा सकता?
उत्तर: नहीं, मैग्नेट को धीरे‑धीरे ‘रैंप‑डाउन’ प्रक्रिया से ही सुरक्षित रूप से बंद किया जा सकता है; अन्यथा यह उपकरण को नुकसान पहुँचा सकता है।
प्रश्न 2: एक सामान्य MRI शट‑डाउन की लागत कितनी होती है?
उत्तर: लगभग 30,000 से 40,000 डॉलर, जो हीलियम पुनः भरने और विशेष शट‑डाउन प्रक्रिया के कारण आता है।