ईरानी राजनयिक अराघची ने कहा कि ईरान नई विकास बैंक (NDB) की सदस्यता पर काम कर रहा है और ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और इरानी विदेश मंत्री पेज़ेश्कियन की बैठक को ‘मजबूत’ कहा।
- ईरान NDB सदस्यता के लिए आधिकारिक तौर पर प्रयास कर रहा है
- ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय सहयोग को अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच बढ़ावा दिया जा रहा है
- मोदी‑पेज़ेश्कियन मुलाक़ात को दोनों पक्षों ने ‘मजबूत’ कहा
इरानी राजनयिक मुहम्मद जावेद अराघची ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान नई विकास बैंक (NDB) की सदस्यता के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह कदम ईरान को ब्रिक्स देशों के आर्थिक मंच में अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में है, जहाँ से वह अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकेगा।
ब्रिक्स देशों ने हालिया वित्तीय वार्ताओं में intra‑BRICS व्यापार को प्रोत्साहित करने और समूह की मुद्राओं के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। इस संदर्भ में, अराघची ने कहा कि ईरान इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार में नई संभावनाएँ खुलेंगी।
इसी दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इरानी विदेश मंत्री मोहम्मद रेज़ा पेज़ेश्कियन की बैठक को दोनों पक्षों ने ‘मजबूत’ बताया। इस मुलाक़ात में नेविगेशन सुरक्षा, समुद्री कर्मियों की सुरक्षा और ईरान‑भारत द्विपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
Historical Background
ईरान ने 2015 में NDB में सदस्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण प्रक्रिया धीमी रही। 2020 के बाद, ब्रिक्स देशों ने आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ सहयोग को बढ़ाने की नीति अपनाई, जिससे ईरान को नई राह मिली।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that ईरान की NDB सदस्यता न केवल उसके आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि ब्रिक्स के भीतर एक नई वित्तीय शक्ति संतुलन स्थापित करेगी, जिससे अमेरिकी आर्थिक दबाव में कमी आएगी।
"ईरान का NDB में प्रवेश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना को पुनः आकार देगा," अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ डॉ. अली शमी ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ईरान की NDB सदस्यता का अनुमानित समय‑सीमा क्या है?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी ब्रिक्स देशों की सहमति मिलती है, तो 2027 तक ईरान सदस्य बन सकता है।
प्रश्न 2: मोदी‑पेज़ेश्कियन मुलाक़ात से कौन‑से प्रमुख समझौते निकले?
उत्तर: समुद्री सुरक्षा, दो‑तरफ़ा व्यापार में वृद्धि, और समूह मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देना प्रमुख बिंदु थे।