भारत-चीन संबंधों में तनाव के बीच, शाशि थरूर ने बताया कि भारत चीन के कड़े कदमों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और मोदी‑शी बैठक के संदर्भ में राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की बात की।
- भारत राष्ट्रीय हित को बहुपक्षीय लक्ष्यों से ऊपर रखेगा
- चीन के आर्थिक दबावों का प्रतिकार करने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों की योजना
- मोदी‑शी बैठक में भारत के शर्तों पर ही द्विपक्षीय वार्ता होगी
मुख्य विदेश नीति चुनौतियां
ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करते हुए, संसद की बाहरी मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शाशि थरूर ने भारत को दरपेश प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कई देशों के प्रमुखों की उपस्थिति के बावजूद, भारत का प्राथमिक लक्ष्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा है, न कि केवल समूह के सामूहिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाना।
द्विपक्षीय वास्तविकताएं बनाम बहुपक्षीय मंच
थरूर ने मोदी‑शी बैठक को लेकर स्पष्ट किया कि लाक (LAC) पर चल रहे तनाव को देखते हुए, भारत को ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी रखना चाहिए, लेकिन द्विपक्षीय वार्तालाप को व्यापक मंच के उद्देश्यों से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “गालवन की अनपेक्षित आक्रमण ने 20 जवानों की जान ली, और हम स्थिति को पूर्व जैसा बनाना चाहते हैं।”
आर्थिक दबाव और रणनीतिक उत्तर
चीन द्वारा दुर्लभ पृथ्वी, टनल बोरिंग मशीन और पावर सबस्टेशन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोककर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति को थरूर ने “हथियारबंद निर्भरता” कहा। उन्होंने कहा, “अगर आप हमारे साथ हार्डबॉल खेलेंगे, तो हम भी हार्डबॉल खेलने को जानते हैं।”
रूस के साथ ऊर्जा संबंध
अमेरिका के संभावित 100% प्रतिबंधों के मद्देनज़र, थरूर ने बताया कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की लागत बहुत अधिक होगी, इसलिए भारत को पश्चिमी व्यापार के बदले ऊर्जा सुरक्षा को चुनना पड़ सकता है।
वित्तीय नीति और मुद्रा सहयोग
विस्तारित 11‑सदस्यीय ब्रिक्स ब्लॉक में डॉलर्सीकरण को रोकने की संयुक्त पहल पर थरूर ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने रूबल‑रुपया जैसे द्विपक्षीय स्थानीय मुद्रा समझौतों को समर्थन दिया, जिससे चीन‑भारत के बीच युआन‑प्रधान विकल्प को सीमित किया जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत-चीन संबंधों की जड़ें 1962 के युद्ध में हैं, जिसके बाद दोनों देशों ने सीमाओं पर कई झड़पें देखी हैं। 2020 में गालवन घाटी में हुए संघर्ष ने दोनों पक्षों के बीच विश्वास को और घटा दिया, जबकि आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में निरंतरता बनी रही है। यह ऐतिहासिक तनाव आज के कूटनीतिक संतुलन को आकार देता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that India's dual strategy—maintaining multilateral engagement while preparing for hardball bilateral negotiations—could reshape power dynamics in Asia and influence the future trajectory of the BRICS bloc.
“India's ability to leverage its strategic autonomy will determine whether it can balance Chinese pressure without alienating Western partners.”
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मोदी‑शी बैठक में सीमा मुद्दे का समाधान होगा?
उत्तर: थरूर ने संकेत दिया है कि बातचीत भारत की शर्तों पर ही होगी, जिससे तुरंत समाधान की संभावना सीमित है।
प्रश्न 2: भारत की ऊर्जा नीति पर अमेरिकी प्रतिबंधों का क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यदि प्रतिबंध लागू होते हैं, तो भारत को रूसी ऊर्जा पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे मूल्य वृद्धि और लॉजिस्टिक चुनौतियां बढ़ेंगी।