पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कंदुला दुर्गेश ने कड़ियाम में फूलों की नर्सरी के लिए एक विशेष अनुसंधान संस्थान की योजना पेश की। यह कदम 300 से अधिक फूल की किस्मों को बढ़ावा देने और छोटे किसानों को बैंक‑लिंकज ऋण सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से है।
- कड़ियाम में 11,500 हेक्टेयर में 300 फूलों की किस्में उगाई जा रही हैं।
- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कंदुला दुर्गेश ने फ्लोरिकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट की योजना पेश की।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए बैंक‑लिंकज ऋण सुविधा का वादा किया गया।
पर्यटन मंत्री का प्रस्ताव
आंध्र प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कंदुला दुर्गेश ने रविवार को राजमहेंद्रवारम में आयोजित सर आर्थर कॉटन नर्सरी किसानों की नई निर्वाचित संस्था को बधाई देते हुए कहा कि कड़ियाम में फूलों की नर्सरी के लिए एक फ्लोरिकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकारों को प्रस्तुत किया जाएगा।
कड़ियाम क्षेत्र की महत्ता
पूर्वी गोदावरी जिले के चार मंडलों—कड़ियाम, अत्रेयापुरम, आलामुरु और मंदापेटा—में 11,500 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 300 सजावटी फूलों की किस्में उगाई जा रही हैं। ये नर्सरी गोदावरी नदी के किनारे बसी हुई हैं, जिससे जलस्रोत की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें
मंत्री दुर्गेश ने कहा, “हम राज्य तथा केंद्र सरकारों के साथ बातचीत शुरू करेंगे ताकि फूलों की नर्सरी के लिए समर्पित एक अनुसंधान संस्थान की स्थापना को गति मिल सके।” यह संस्थान न केवल नई किस्मों के विकास पर काम करेगा, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक एवं बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा।
बैंक‑लिंकज ऋण सुविधा
लगभग 90% फूल नर्सरी किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने बैंक‑लिंकज ऋण सुविधा की घोषणा की। “बैंकों और अन्य हितधारकों को योजनाओं और ऋण सुविधाओं पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाएगा,” उन्होंने कहा।
संघ की नई अध्यक्षता और चेक भेंट
सर आर्थर कॉटन नर्सरी किसानों के संघ के नए अध्यक्ष बोरसू सुब्बा रायडू ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में मंत्री दुर्गेश और ग्रामीण विधायक जी. बुट्चैया चौधरी के समक्ष शपथ ली। पूर्व अध्यक्ष रत्नम अय्यप्पा ने फूल नर्सरी कर्मचारियों और किसानों के कल्याण हेतु 5 लाख रुपये का चेक मंत्री को सौंपा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सर आर्थर कॉटन नर्सरी किसानों की एसोसिएशन की स्थापना 1990 के दशक में हुई, जब राज्य ने फूल उत्पादन को कृषि विविधीकरण का प्रमुख हिस्सा माना। तब से ही कड़ियाम क्षेत्र ने भारत के प्रमुख फूल निर्यात केंद्रों में से एक का दर्जा हासिल किया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ी उछाल मिली है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that establishing a dedicated research institute can boost export earnings, create skilled jobs, and set a benchmark for horticultural innovation across South India.
"फ्लोरिकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट न केवल वैज्ञानिक प्रगति लाएगा, बल्कि छोटे किसानों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा," कृषि विशेषज्ञ डॉ. रवींद्रन ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस रिसर्च इंस्टिट्यूट की स्थापना में कितना समय लगेगा?
उत्तर: प्रारंभिक प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद, अनुमानित दो से तीन साल में पूरी तरह कार्यात्मक हो सकता है।
प्रश्न 2: छोटे किसानों को कौन-कौन से लाभ मिलेंगे?
उत्तर: वे नई किस्मों, प्रशिक्षण, और बैंक‑लिंकज ऋण जैसी वित्तीय सहायता से उत्पादन बढ़ा सकेंगे।