कर्नाटक सरकार ने हाल ही में यह घोषणा की कि 91.3% मतदाता मानचित्रित हो चुके हैं, पर ड्राफ्ट रोल में एक करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की रिपोर्ट ने सवालों को जन्म दिया है। 91% आँकड़ा केवल कवरेज दर्शाता है, वास्तविक सफलता पर संदेह बढ़ रहा है।
- 91.3% मतदाता मानचित्रित, पर 1.07 करोड़ नाम हटाए गए
- मापन और हटाने के बीच स्पष्ट अंतर पर सवाल
- कोडागु में उच्च मानचित्रण दर के बावजूद बड़ी संख्या में हटाव
कर्नाटक चुनाव मानचित्रण की पृष्ठभूमि
कर्नाटक के चुनाव आयोग ने 2026 में एक विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) के तहत 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 5.06 करोड़ को मानचित्रित किया। इस प्रयास का उद्देश्य 2002 के रोल से मेल खाते हुए नामों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपडेट करना था। लेकिन ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद, 1.07 करोड़ नाम हटाए गए, जिससे 91% मानचित्रण आँकड़ा पर संदेह बढ़ा।
मापन बनाम हटाव: आँकड़ों के बीच अंतर
बोथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने बताया कि ‘नकशा नहीं’ के तहत 23.45 लाख नोटिस जारी किये गए, जबकि पूर्व-गणना में 48.21 लाख अनमापित मतदाता बताए गए थे। यह अंतर यह सवाल उठाता है कि क्या मानचित्रण डेटा का इस्तेमाल नोटिस जारी करने में हुआ या केवल सर्वेक्षण फॉर्म पर आधारित था।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि मानचित्रण का 91% आँकड़ा केवल कवरेज का संकेत है, न कि सफलता का। यदि मानचित्रण के बाद भी 1 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाते हैं, तो यह मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
“मानचित्रण और हटाव के बीच यह असंगति मतदाता विश्वास को कम कर सकती है, खासकर कोडागु जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जनसंख्या गतिशील है।”
कोडागु का मामला
कोडागु में 98.67% मानचित्रण दर के बावजूद 13% हटाव दर्ज हुआ। 4.68 लाख नामों में से 4.62 लाख मानचित्रित हुए, लेकिन 58,890 से अधिक नोटिस जारी हुए। यह दर्शाता है कि मानचित्रण के बावजूद भी हटाव की प्रक्रिया जटिल है।
इतिहासी पृष्ठभूमि
कर्नाटक के चुनाव आयोग ने 2002 के रोल को आधार बनाकर मानचित्रण शुरू किया, पर हाल के वर्षों में जनसंख्या में बदलाव, विशेषकर कोडागु के वन जनजातीय क्षेत्रों में, ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया। 2024 में भी इसी प्रकार की चुनौतियाँ सामने आई थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: 91% मानचित्रण का क्या मतलब है?
A1: यह केवल यह दर्शाता है कि कितने प्रतिशत मतदाताओं के नाम और पते मानचित्रण प्रणाली में दर्ज हैं, जरूरी नहीं कि वे सफलतापूर्वक वोट देने योग्य हों।
Q2: क्यों इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए?
A2: हटाव ‘अनुपस्थित’, ‘स्थानांतरित’, ‘डुप्लिकेट’ और ‘मृत’ जैसी श्रेणियों के आधार पर किया गया, पर अक्सर मानचित्रण डेटा के बावजूद ये हटाव हो रहे हैं।