बीजिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्र विदेश नीति के बयान को स्वागत किया और कहा कि भारत-चीन संबंध किसी तीसरे देश से प्रभावित नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी BRICS शिखर सम्मेलन के बाद हुई द्विपक्षीय मुलाकात के बाद आई है।

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  • भारत-चीन संबंधों को स्वतंत्र और साझेदार माना गया
  • BRICS शिखर सम्मेलन के बाद द्विपक्षीय वार्ता ने नई दिशा दी
  • सीमा विवाद के समाधान में संवाद को प्राथमिकता दी गई

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को स्वागत किया। दो देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक के बाद बीजिंग ने मोदी के "स्वतंत्र विदेश नीति" के बयान को "महत्वपूर्ण कदम" कहा।

पृष्ठभूमि

पिछले सात वर्षों में शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा के बाद यह तीसरी मुलाकात थी। दोनों नेताओं ने आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें सीमा विवाद का समाधान भी शामिल था।

मुख्य बिंदु

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है और दोनों देशों के संबंधों को किसी तीसरे देश के प्रभाव से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों को "साझेदार" के रूप में आगे बढ़ने की अपील की।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that इस बयान से एशिया‑प्रशांत में शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत मिलता है, जहाँ भारत और चीन दोनों ही वैश्विक दक्षिण के प्रमुख खिलाड़ी हैं। स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन चीन को भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है।

"भारत-चीन संबंधों में स्वतंत्रता का सम्मान दोनों देशों के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है," कहा अंतर्राष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा।

Did You Know?

Did You Know?: भारत और चीन विश्व के दो सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों के रूप में वैश्विक आर्थिक मंचों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

बैठक में व्यापार और निवेश के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को स्थिर और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, विशेषकर डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में।

सीमा विवाद के संदर्भ में, दोनों देशों ने शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। यह बयान तनाव को कम करने और सहयोगी माहौल को बढ़ावा देने के लिए एक सकारात्मक संकेत माना गया।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह बयान भारत-चीन सीमा विवाद को हल करेगा?

उत्तर: यह एक सकारात्मक कदम है, परंतु वास्तविक समाधान के लिए निरंतर वार्ता और भरोसे की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 2: क्या इस बयान से भारत की विदेश नीति में कोई बदलाव आएगा?

उत्तर: भारत ने पहले से ही स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन किया है; यह बयान उसकी निरंतरता को दर्शाता है।