आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने पक्षियों के पंखों से प्रेरित एक अनुकूलनशील मोर्फिंग स्किन विकसित किया है, जो विमान के स्टॉल को रोकता है, लिफ्ट बढ़ाता है और ड्रैग कम करता है। यह तकनीक दो दशकों से चल रहे एयरोडायनामिक्स शोध का परिणाम है।

  • पक्षी‑प्रेरित मोर्फिंग स्किन स्टॉल को रोकता है
  • लिफ्ट बढ़ेगी, ड्रैग घटेगा, ईंधन दक्षता सुधरेगी
  • 20 साल के एयरोडायनामिक्स शोध पर आधारित

डॉ. रिंकु मुखर्जी और उनके सहयोगियों ने मैक्रो फाइबर कंपोजिट (MFC) स्ट्रिप्स का उपयोग करके एक लचीला बाहरी पंख अटैचमेंट तैयार किया, जो वास्तविक‑समय में हवा के प्रवाह के अनुसार अपना आकार बदलता है। यह प्रणाली विमान के पंख पर प्रवाह के अलगाव को रोकती है और उच्च कोण पर भी लिफ्ट बनाए रखती है।

विमान में एयरोडायनामिक स्टॉल तब होता है जब हवा पंख से अलग हो जाती है, जिससे अचानक लिफ्ट घटती है और ड्रैग बढ़ जाता है। नई स्किन के कारण हवा पंख के साथ चिपक कर रहती है, जिससे पंख का प्रभावी कंबर (camber) स्वतः समायोजित हो जाता है।

इस शोध में उपयोग किए गए MFC स्ट्रिप्स सेंसर और एक्ट्यूएटर दोनों की भूमिका निभाते हैं—वे हवा की गति और दिशा को महसूस कर आकार में तुरंत बदलाव करते हैं। डॉ. मुखर्जी ने बताया, "उड़ान के दौरान पंख का झुकाव कभी‑कभी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बढ़ जाता है, इस समय मोर्फिंग स्किन पंख को सुरक्षित झुकाव पर रखता है और अतिरिक्त लिफ्ट प्रदान करता है।"

यह तकनीक 20 से अधिक वर्षों की निरंतर अनुसंधान का परिणाम है। शुरुआती परीक्षणों में NACA 4415 एयरफॉइल पर 3D पंख पर लागू किया गया, जहाँ स्किन ने प्रवाह अलगाव को प्रभावी रूप से रोका और लिफ्ट में उल्लेखनीय वृद्धि तथा ड्रैग में कमी दर्शायी।

परिणाम यूरोपीय जर्नल ऑफ मैकेनिक्स में प्रकाशित हुए और इसमें डॉ. अत्रितास रॉय ने भी सहयोग किया। इस शोध ने पूर्व में ड्रडो (DRDO) द्वारा वित्त पोषित कई प्रोजेक्ट्स को भी सुदृढ़ किया है, जैसे कि मोर्फिंग विंग एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी (MWAT) और अनस्टेडी एयरोडायनामिक्स पर किए गए प्रयोग।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that adaptive morphing skins could revolutionize commercial aviation by cutting fuel consumption up to 15% and enhancing safety margins during critical phases such as take‑off and landing.

"यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू किया गया तो भविष्य की हवाई यात्रा अधिक पर्यावरण‑मित्र और सुरक्षित बन सकती है," कहा एरोस्पेस विशेषज्ञ प्रो. अनिल शेट्टी ने।
Did You Know?: मोर्फिंग स्किन की अवधारणा पहली बार 1990 के दशक में पक्षियों के पंखों के माइक्रो‑संरचनात्मक अध्ययन से उभरी थी।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या यह स्किन मौजूदा वाणिज्यिक विमानों में retrofitted की जा सकती है?
A1: प्रारंभिक परीक्षणों में इसे मौजूदा पंखों पर जोड़ने योग्य मॉड्यूलर डिज़ाइन के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए अतिरिक्त प्रमाणन की आवश्यकता होगी।

Q2: इस तकनीक की लागत कितनी होगी?
A2: वर्तमान में प्रोटोटाइप चरण में है, लेकिन अनुमान है कि बड़े उत्पादन में लागत परंपरागत स्टैटिक पंखों के तुलनात्मक रूप से समान या थोड़ा अधिक होगी, जबकि ईंधन बचत इसे संतुलित करेगी।