पूर्व दिल्ली सचिव राकेश मेहता की आत्महत्या ने दिखाया कि बुढ़ापे में मानसिक स्वास्थ्य संकट अक्सर छिपा रहता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वरिष्ठ नागरिकों के आत्महत्याओं की संख्या अन्य समूहों से तेज़ी से बढ़ी है। इस लेख में AIIMS दिल्ली की प्रोफ़ेसर डॉ. ममता सूद की सलाह और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई है।

  • बुढ़ापे में आत्महत्या का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
  • रोग, अलगाव और पहचान की हानि प्रमुख कारण हैं।
  • समय पर हस्तक्षेप और नया उद्देश्य बनाना जोखिम कम कर सकता है।

पूर्व दिल्ली प्रमुख सचिव की आत्महत्या और उसके पीछे का सन्देश

राकेश मेहता, 75 वर्ष के, ने नोएडा के अपने घर में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि उनकी नोट में दीर्घकालीन बीमारी का उल्लेख था, जबकि रिपोर्टों में बताया गया कि वे अकेले रहते थे और उच्च रक्तचाप व मधुमेह से पीड़ित थे। यह घटना दिखाती है कि बुढ़ापे में रोग, अलगाव और पेशेवर पहचान का नुकसान कैसे व्यक्ति को संकट की ओर धकेल सकता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के नवीनतम आँकड़े

2024 में भारत में 1,70,746 आत्महत्या हुई, जिनमें वरिष्ठ नागरिकों की संख्या अन्य आयु समूहों से तेज़ी से बढ़ी है। 60 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए रोग, अलगाव और स्वायत्तता का नुकसान प्रमुख कारण बन रहे हैं। NCRB के अनुसार, 2024 में रोगों ने 18% आत्महत्याओं में योगदान दिया, जो परिवारिक समस्याओं के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले लोगों में आत्महत्या की मृत्यु का 16.6% हिस्सा है।

डॉ. ममता सूद का विश्लेषण

AIIMS दिल्ली की मनोचिकित्सा प्रोफ़ेसर डॉ. ममता सूद ने कहा, “जैसे-जैसे हम उम्र बढ़ाते हैं, सबसे कठिन परिवर्तन केवल सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि अधिकार, स्थिति, स्वतंत्रता और शारीरिक शक्ति की धीरे-धीरे घटती हुई पहचान से निपटना है।” वे आगे जोड़ती हैं कि “उम्र बढ़ने को एक नए अध्याय के रूप में देखना चाहिए, न कि अप्रासंगिकता के सामना के रूप में।”

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में वरिष्ठ नागरिकों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अभी भी सीमित है। यदि समाज और नीतिनिर्माता इस बदलाव को पहचानते हैं और सक्रिय समर्थन नेटवर्क बनाते हैं, तो आत्महत्या के मामलों में उल्लेखनीय कमी संभव है।

“सहानुभूति और प्रोत्साहन का सही मिश्रण बुढ़ापे में मानसिक कल्याण के लिए सबसे बड़ा हथियार है।”

क्या आप जानते हैं?

Did You Know?: 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में डिप्रेशन की दर 15-35% तक हो सकती है, विशेषकर यदि वे मधुमेह या कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों से ग्रस्त हों।

सामान्य प्रश्न

1. बुजुर्गों में आत्महत्या के मुख्य कारण क्या हैं?

मुख्य कारणों में दीर्घकालीन रोग, सामाजिक अलगाव, स्वतंत्रता की हानि और पेशेवर पहचान का समाप्त होना शामिल हैं।

2. परिवार और समाज क्या कर सकते हैं?

नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, सामाजिक समर्थन समूह, और रोग प्रबंधन कार्यक्रमों के माध्यम से जोखिम को कम किया जा सकता है।