आंध्र प्रदेश में ड्रग कंट्रोल ने 55 मेडिकल शॉप्स में ट्रामाडोल की अनधिकृत बिक्री का खुलासा किया। 7,550 इंजेक्शन जब्त किए गए और फर्जी बिलों की जाँच के बाद एलुरु जिले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- 55 में से 55 दवा दुकानों में बिक्री नियमों का उल्लंघन पाया गया
- 7,550 ट्रामाडोल इंजेक्शन जब्त किए गए, कई फर्जी बिलों का खुलासा हुआ
- ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने लाइसेंस रद्दी और कड़ी कानूनी कार्रवाई का वादा किया
ऑपरेशन का विस्तृत विवरण
आंध्र प्रदेश राज्य ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने एलुरु जिले में पाँच व्यक्तियों की गिरफ़्तारी के बाद पूरे राज्य में 100 मेडिकल शॉप्स की जाँच शुरू की। स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग के एक विज्ञप्ति के अनुसार, 55 शॉप्स में विभिन्न प्रकार के उल्लंघन मिले, जिनमें दो शॉप्स (कृष्णा और एनटीआर जिलों में) ने बड़ी मात्रा में दवाइयाँ बिलों के बिना खरीदी और बेची।
जांच का आदेश स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने दिया था और ड्रग कंट्रोल प्रशासन के निदेशक‑जनरल अरुण बाबू ने निगरानी की। यह कार्रवाई जंगरेड्डीगुडेम के वेगावराम गांव में तेल के पेड़ के बाग में खाली व टूटे हुए इंजेक्शन वैल और उपयोग किए गए सिरिंज मिलने के बाद शुरू हुई।
मुख्य दवा और ब्रांड
जबरदस्त मात्रा में पाए गए इंजेक्शन ट्रामाडोल के थे, जो ट्रामोडेक्स और ट्रामेक ब्रांड नामों के तहत बेचे जा रहे थे। ट्रामाडोल एक दर्दनिवारक है, जिसका दुरुपयोग नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
उल्लंघन के प्रमुख केस
एलुरु जिले की श्री लक्ष्मी श्रीनिवास मेडिकल एजेंसी ने इस साल दो बिलों के माध्यम से 20,000 ट्रामाडोल इंजेक्शन खरीदे, परन्तु बिक्री के बिल प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस कारण अधिकारियों ने कई स्थानों पर छापे मारे और 7,550 इंजेक्शन जब्त किए।
दूसरे केस में डी. रूपा पेडिंती मेडिकल एजेंसी ने पिछले दो वर्षों में 5,200 ट्रामेक इंजेक्शन खरीदे। उन्होंने 3,930 इंजेक्शन तेलंगाना के एक मेडिकल शॉप को बेचे होने का दावा किया, परंतु तेलंगाना अधिकारियों ने इसे धोखाधड़ी बताया।
फर्जी बिलों का खुलासा
जाँच में पता चला कि कई फर्जी बिल तैयार किए गए थे और दवाइयाँ वास्तविक बिक्री रिकॉर्ड के बिना अन्य दुकानों में पहुंचाई गई थीं। इस कारण पाँच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked Tramadol distribution not only fuels illicit drug markets but also undermines public health initiatives, especially in rural Andhra regions where medical oversight is already limited.
"अनधिकृत ट्रामाडोल बिक्री का दुष्प्रभाव सामाजिक और स्वास्थ्य दोनों स्तरों पर गंभीर है," सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रजत सिंह ने कहा।
Historical Background
भारत में ट्रामाडोल को 2018 में "नियंत्रित दवा" की सूची में शामिल किया गया, जिससे इसका विक्रय केवल लाइसेंसधारी फार्मेसियों और डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन पर ही संभव हो। पिछले वर्षों में कई राज्यों में इस दवा के दुरुपयोग को रोकने के लिए कठोर उपाय लागू किए गए, लेकिन अनियमित बिक्री अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या ट्रामाडोल का कोई वैध उपयोग है?
हां, यह केवल डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन पर गंभीर दर्द के इलाज में प्रयोग किया जाता है।
Q2: ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोकने की योजना बनाई है?
लाइसेंस रद्दी, कड़ी निगरानी, और अनधिकृत भंडारण व परिवहन पर सख्त दंड लागू किया जाएगा।