कर्नाटक सरकार ने Bagalkot के कांग्रेस विधायक Umesh Meti की भतीजी Dr Ankita Yaragal को सरकारी मेडिकल अधिकारी के पद से निकाल दिया, क्योंकि वह एक निजी मेडिकल कॉलेज में MD पढ़ते हुए भी Rs 75,000 की मासिक वेतन ले रही थी। यह निर्णय गजानन बाले, जिला अधिकारी के निर्देश पर लिया गया।
- Dr Ankita Yaragal को 75,000 रुपये की मासिक वेतन प्राप्त हुई जबकि वह निजी MD कोर्स में नामांकित थी।
- कर्नाटक सरकार ने अनुबंध समाप्त कर दिया और जाँच की घोषणा की।
- किसी भी पक्ष ने इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है।
कर्नाटक सरकार ने सोमवार को Bagalkot के कांग्रेस विधायक Umesh Meti की भतीजी Dr Ankita Yaragal को सरकारी मेडिकल अधिकारी के पद से हटाने का आदेश जारी किया, जब यह स्पष्ट हुआ कि वह एक निजी मेडिकल कॉलेज में MD पढ़ते हुए भी Namma Clinic, Wambe Colony, Bagalkot में Rs 75,000 की वेतन ले रही थी।
पृष्ठभूमि
Dr Ankita को अप्रैल 2025 में Namma Clinic में एक कॉन्ट्रैक्ट मेडिकल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि, रजकुमार यारागल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO), के अनुसार, यह पद केवल प्रशासनिक रूप से ही था और वह स्वयं कार्य नहीं करती थीं। स्थानीय सक्रियक रजु नाइक ने दावा किया कि डॉक्टर ने तीन महीनों से क्लिनिक में उपस्थिति नहीं रखी, जबकि रोगी शिकायत कर रहे थे।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण बताता है कि यह घटना सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव को उजागर करती है। जब एक सरकारी पद का उपयोग निजी शिक्षा के लिए किया जाता है, तो यह न केवल करदाताओं के पैसे की बर्बादी है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को भी कमजोर करता है।
"किसी भी सार्वजनिक पद का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है," कहते हैं प्रोफेसर आर. पुंजा, राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: क्या Dr Ankita Yaragal को अभी भी वेतन मिला है?
उत्तर: रजकुमार यारागल ने कहा कि उन्होंने पद छोड़ते ही वेतन जारी नहीं किया।
प्रश्न 2: क्या Umesh Meti पर कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
उत्तर: अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस पर टिप्पणी नहीं की है, परंतु कर्नाटक सरकार ने जाँच का आह्वान किया है।