केरल में अब तक केवल 250 संस्थानों को ही ‘इट राइट कैंपस’ प्रमाणपत्र मिला है, जबकि राज्य के 204 संस्थाओं का प्रमाणपत्र दो साल की अवधि समाप्त हो चुका है। यह पहल फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) द्वारा कैंपस में सुरक्षित, स्वास्थ्यवर्धक और सतत भोजन सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी।

  • केरल में केवल 250 संस्थानों को इट राइट कैंपस प्रमाणपत्र मिला
  • 204 संस्थाओं का प्रमाणपत्र अब समाप्त हो चुका है
  • प्रमाणन प्रक्रिया में चार प्रमुख मानदंड शामिल हैं

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ‘इट राइट कैंपस’ पहल का उद्देश्य कैंपस में भोजन को सुरक्षित, स्वास्थ्यवर्द्धक और पर्यावरणीय रूप से सतत बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत कॉलेज, विश्वविद्यालय, सरकारी एवं निजी संस्थान, एनजीओ, अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्र और जेलें भी प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकती हैं।

केरल में वर्तमान में 250 संस्थानों को यह प्रमाणपत्र मिला है। जिलेवार वितरण इस प्रकार है: कन्नूर (27), कोल्लम और त्रिशूर (प्रत्येक 25), थिरुवनंतपुरम (17), पाथनमथिट्टा (12), अलप्पुझा (20), कोट्टायाम (18), एर्नाकुलम (19), इडुक्की (16), पलक्कड़ (19), मलप्पुरम (23), कोझिकोडे (14), वायनाड (8), कासरगोड (7)।

मूल्यांकन मानदंड: संस्थानों का मूल्यांकन चार प्रमुख पैरामीटर पर किया जाता है – (1) खाद्य सुरक्षा उपाय, (2) स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन की उपलब्धता, (3) पर्यावरणीय स्थिरता, तथा (4) छात्रों एवं कर्मचारियों में सही भोजन चयन की जागरूकता। तीन या अधिक सितारे प्राप्त करने वाले संस्थान को दो साल की वैधता के साथ ‘इट राइट कैंपस’ प्रमाणपत्र दिया जाता है।

हाल ही में राज्य में 204 संस्थानों का प्रमाणपत्र समाप्त हो गया, जिससे कई कैंपस में खाद्य सुरक्षा की निगरानी में अंतर आ सकता है। अधिकारियों ने बताया कि कई संस्थान प्रक्रियात्मक जटिलताओं और फंडिंग में देरी के कारण प्रमाणन में भाग नहीं ले पा रहे हैं।

Historical Background

‘इट राइट कैंपस’ परियोजना 2019 में FSSAI द्वारा शुरू की गई, जिसका लक्ष्य भारत के शैक्षणिक संस्थानों में खाद्य‑सुरक्षा मानकों को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत करना था। तब से, देश भर में 5,000 से अधिक संस्थानों ने इस मान्यता को हासिल किया है, लेकिन केरल में इस गति में अपेक्षाकृत कमी आई है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the low adoption rate in Kerala could exacerbate public‑health risks, especially as campuses are high‑density environments where food‑borne illnesses can spread rapidly.

"सही पोषण और सुरक्षा मानकों के बिना कैंपस में स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है," कहा प्रो. अंजली मेहता, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ।
Did You Know?: भारत में केवल 10% कैंपस ही अभी तक ‘इट राइट कैंपस’ मानक को पूरा कर पाए हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: इट राइट कैंपस प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहता है?
A: प्रमाणपत्र दो साल की वैधता रखता है, जिसके बाद पुन: मूल्यांकन आवश्यक होता है।

Q2: कौन‑सी संस्थाएँ इस प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकती हैं?
A: कॉलेज, विश्वविद्यालय, सरकारी‑निजी दोनों प्रकार के कार्यस्थल, एनजीओ, अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्र और जेलें आवेदन कर सकती हैं।