केंद्रीय सरकार के निर्देश के तहत, केरल में 44,279 परिवार प्रायोरिटी राशन श्रेणी से बाहर हो रहे हैं। यह कदम छह लगातार महीनों तक राशन न लेने वाले परिवारों को हटाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे 5,370 एएवाई कार्डधारियों और 38,909 पीएचएच कार्डधारियों पर असर पड़ेगा।

  • 44,279 परिवार प्रायोरिटी श्रेणी से हटाए जा रहे हैं।
  • एएवाई और पीएचएच कार्डधारियों पर 5,370 और 38,909 की संख्या प्रभावित।
  • केंद्रीय आदेश का उद्देश्य राशन दुरुपयोग को रोकना है।

केंद्रीय सरकार के हालिया निर्देश के अनुसार, केरल में 44,279 परिवारों को प्रायोरिटी राशन श्रेणी से हटाया जा रहा है। यह कदम उन परिवारों को लक्षित करता है जिन्होंने पिछले छह महीनों में अपने राशन का दावा नहीं किया है। इस निर्णय का असर 5,370 एएवाई (अंत्योदय अन्न योजना) कार्डधारियों और 38,909 प्रायोरिटी होमहोल्ड (पीएचएच) कार्डधारियों पर पड़ेगा।

केरल के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के आंकड़ों के अनुसार, इन परिवारों में कुल 66,701 लाभार्थी हैं, जो पिछले छह महीनों में किसी भी राशन का दावा नहीं कर पाए। इसके अलावा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत न आने वाले 5,62,494 राशन कार्डधारियों में भी इसी तरह की कमी पाई गई है।

यह कदम एक बड़े प्रयास का हिस्सा है, जिसे “वन नेशन वन राशन कार्ड” (ओएनओआरसी) योजना के तहत लागू किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में, पीडीएस पर बढ़ती निगरानी के कारण, कई बार अवैध बिक्री और दुरुपयोग के मामलों का पता चला है।

हाल के जांचों में पता चला कि नियमित रूप से राशन न लेने वाले परिवारों के लिए आवंटित कोटा को काले बाजार में बेचा जा रहा था। ओम वसंत के दौरान, थिरुवानंतपुरम और कोल्लम जिलों में 75,000 किलोग्राम चावल जब्त किया गया। इसी प्रकार, पारासाला के एक घर से भी 6,000 किलोग्राम चावल और गेहूं जब्त हुए।

ये अवैध रूटीन एक इंटरस्टेट रैकेट का हिस्सा हैं, जो तमिलनाडु से मुफ्त में वितरित चावल को केरल में लाकर, उसे ब्रांडेड पैकेजिंग के साथ बाजार में बेचता है। इस तरह के दुरुपयोग से सरकार के राशन कार्यक्रम पर गहरा असर पड़ता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह कदम न केवल दुरुपयोग को रोकता है, बल्कि अन्य योग्य परिवारों को प्रायोरिटी सूची में शामिल होने का अवसर भी देता है। हालांकि, हटाए गए परिवारों को स्थायी रूप से बाहर नहीं किया जाएगा; वे पुनः आवेदन करके अपनी स्थिति वापस पा सकते हैं।

"राशन प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाना आवश्यक है, ताकि असली जरूरतमंदों तक लाभ पहुँच सके," कहते हैं नीति विश्लेषक डॉ. रघु शर्मा।
Did You Know?: भारत में 2020 के बाद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 12% की वृद्धि हुई है, जिससे लाखों परिवारों को मुफ्त राशन का लाभ मिला है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या हटाए गए परिवार फिर से प्रायोरिटी सूची में शामिल हो सकते हैं?
A1: हाँ, वे नए आवेदन के माध्यम से पुनः शामिल हो सकते हैं।

Q2: क्या प्रायोरिटी कार्डधारियों को पूरी तरह से लाभ से वंचित किया जाएगा?
A2: नहीं, उन्हें अस्थायी रूप से हटाया गया है, परंतु पुनः आवेदन से लाभ वापस मिल सकता है।