विज़ाखापत्तनम में इस साल विनायक चविथि के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) गनेश मूर्तियों की भारी मांग देखी गई, जबकि पर्यावरणीय चेतावनियों के बावजूद। कई एनजीओ और नगर निगम ने मिट्टी की वैकल्पिक मूर्तियां मुफ्त में वितरित कीं, पर PoP की आकर्षक दिखावट ने खरीदारों को आकर्षित किया।

  • PoP गनेश मूर्तियां पर्यावरणीय चेतावनियों के बावजूद लोकप्रिय बनीं
  • मूर्तियों की कीमत ₹100 से लेकर कई हजार रुपये तक विविध
  • मुक्त मिट्टी की मूर्तियों ने PoP की मांग को नहीं घटाया

PoP मूर्तियों की व्यापक उपलब्धता

विज़ाखापत्तनम में विनायक चविथि के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) गनेश मूर्तियों की बिक्री कई स्थानों पर तेज़ी से हुई। कीमतें आकार और डिज़ाइन के आधार पर ₹100 से लेकर कई हजार रुपये तक थीं। स्थानीय विक्रेता राजेश ने बताया, "अंकापली में हम केवल 10% मिट्टी की मूर्तियां बेचते हैं, बाकी सब PoP हैं। ग्राहक मुख्यतः PoP माँगते हैं।"

एनजीओ और नगरपालिका की कोशिशें

ग्रेटर विज़ाखापत्तनम नगर निगम, विभिन्न एनजीओ और निजी संस्थाओं ने पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने के लिए मुफ्त में मिट्टी की गनेश मूर्तियां वितरित कीं। हालांकि, कई घरों में भक्तों ने एक साथ दोनों प्रकार की मूर्तियां स्थापित कीं, जिससे PoP की माँग पर असर नहीं पड़ा।

पर्यावरणीय जोखिम

पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि PoP मूर्तियां जल में आसानी से घुलती नहीं हैं और समुद्र तटों पर कई हफ्तों तक रह सकती हैं। रंग और सजावट में उपयोग किए गए रसायन जल की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जलीय जीवों को हानि पहुँचा सकते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that continued reliance on PoP idols not only undermines local clean‑up efforts but also sets a precedent for other coastal cities in India, potentially escalating marine pollution on a national scale.

"PoP idols may look attractive, लेकिन उनका दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव अनदेखा नहीं किया जा सकता," कहा पर्यावरणविद् डॉ. रवीना शर्मा ने।
Did You Know?: भारत में केवल 5% गनेश मूर्तियां ही आधिकारिक रूप से जल में घुलनशील मानी जाती हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या मुफ्त मिट्टी की मूर्तियां PoP की मांग को कम कर सकती हैं?
A: अभी तक इसका स्पष्ट प्रभाव नहीं दिखा है; कई भक्त दोनों प्रकार की मूर्तियां रखते हैं।

Q2: PoP मूर्तियों के जल में डूबने से किन पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
A: ये मूर्तियां जल में नहीं घुलती, जिससे तटों पर कचरा जमा होता है और जल गुणवत्ता घटती है।

समाप्ति

विज़ाखापत्तनम में PoP गनेश मूर्तियों का दबदबा यह दर्शाता है कि पारंपरिक और पर्यावरण‑मित्र विकल्पों को अपनाने के लिए अधिक जागरूकता और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।