मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में की गई नई सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी तकनीक ने 75 में से 70 रोगियों को व्यापक गर्दन सर्जरी से बचाया। यह विधि टंग कैंसर के शुरुआती चरण में लिम्फ नोड्स के फैलाव का सटीक पता लगाती है, जिससे अनावश्यक ऑपरेशन कम होते हैं।

  • सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी 70 में से 70 रोगियों को बचा सकती है।
  • प्रक्रिया में केवल 3 सेमी का छोटा चीरा और 4.5 दिन का अस्पताल में रहने का समय।
  • क्लिनिकल डेटा दिखाता है कि यह विधि पारंपरिक सर्जरी के बराबर परिणाम देती है।

मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में डॉ. मानदरस पेंडे ने 2023 में सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी (SLNB) को टंग कैंसर के शुरुआती चरण में लागू किया। 75 रोगियों में से 70 ने इस प्रक्रिया के बाद व्यापक गर्दन सर्जरी से बचाव पाया, जबकि केवल 5 रोगियों में लिम्फ नोड्स में कैंसर पाया गया और उन्होंने पूर्ण गर्दन डिसेक्शन कराया।

क्लिनिकल प्रक्रिया का अवलोकन

प्रक्रिया की शुरुआत रोगी की जीभ में एक रेडियोसक्रिय ट्रेसर के इंजेक्शन से होती है। इमेजिंग के माध्यम से यह ट्रेसर पहले पहुँचने वाले लिम्फ नोड को पहचानता है। सर्जरी के दौरान इस ‘सेंटिनल’ नोड को छोटा चीरा लगाकर हटाया जाता है और उसी समय एक इंट्रा ऑपरेटिव टेस्ट से कैंसर के अस्तित्व का पता लगाया जाता है। यदि नोड साफ़ रहता है तो रोगी को अतिरिक्त सर्जरी से बचाया जाता है।

पारंपरिक सर्जरी के नुकसान

पारंपरिक रूप से, टंग कैंसर के रोगियों को अक्सर पूरी गर्दन की सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें कई लिम्फ नोड्स को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया दर्द, सुन्नता, कंधे की गतिशीलता में कमी और बड़े निशान के साथ जुड़ी होती है। डॉ. पेंडे के अनुसार, केवल 10-20% रोगियों में लिम्फ नोड्स में वास्तव में कैंसर होता है, जिससे अधिकांश रोगी अनावश्यक ऑपरेशन से गुजरते हैं।

वैश्विक मान्यता और सीमाएँ

सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी को जापान और यूरोप में रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स के माध्यम से मान्यता प्राप्त है। हालांकि, भारत में यह तकनीक अभी भी सीमित केंद्रों तक ही उपलब्ध है, क्योंकि इसमें विशेष इमेजिंग उपकरण और नाभिकीय चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that reducing the extent of surgery not only improves patient quality of life but also lowers healthcare costs and resource utilization in tertiary care centers.

“Sentinel lymph node biopsy offers a less invasive yet reliable approach to early tongue cancer management.” — Dr. Mandar Deshpande
Did You Know?: The concept of sentinel lymph node biopsy was first introduced in melanoma treatment in the 1990s.

Frequently Asked Questions

Q1: क्या सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी सभी टंग कैंसर रोगियों के लिए उपयुक्त है?

Q2: इस प्रक्रिया के बाद रोगी को कितने समय में सामान्य गतिविधियाँ शुरू करनी चाहिए?