एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रम्प प्रशासन के उस नियम को अस्थायी रूप से रोक दिया, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर और विदेशी पत्रकारों के रहने की अवधि पर सीमा लगाता था। यह निर्णय मौजूदा 'duration of status' ढांचे को बरकरार रखता है, जिससे हजारों छात्रों को राहत मिलती है।
- संघीय न्यायाधीश ने ट्रम्प‑युग के वीज़ा नियम को रोका, जिससे छात्र के रहने की अवधि पर चार‑वर्षीय सीमा लगती।
- मौजूदा ‘duration of status’ ढांचा अभी भी प्रभावी है।
- निर्णय DHS के राष्ट्रीय‑सुरक्षा औचित्य और शैक्षणिक स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव पर सवाल उठाता है।
14 सितंबर 2026 को, अमेरिकी जिला न्यायाधीश F. Dennis Saylor IV ने एक प्रारंभिक रोक लगाने का आदेश जारी किया, जिसने ट्रम्प युग की उस नीति को रोक दिया जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर और विदेशी पत्रकारों की अमेरिका में रहने की अवधि पर सीमा लगाने के लिए बनाई गई थी।
विवादित नियम, जिसे जुलाई में गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अंतिम रूप दिया, लगभग पचास साल पुरानी ‘duration of status’ ढांचे को बदलकर F‑1 और J‑1 वीज़ा धारकों के लिए चार वर्ष की कठोर सीमा लगा देता। ऐसे कार्यक्रम जो सामान्यतः उस अवधि से अधिक होते हैं—जैसे पीएचडी अध्ययन—को औपचारिक विस्तार और DHS की मंजूरी की आवश्यकता होती।
जज स्केलर के 48 पृष्ठों के आदेश में पाया गया कि DHS ने यह साबित नहीं किया कि नियम वीज़ा धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोक देगा या ओवरस्टे को रोकेगा। उन्होंने सार्वजनिक टिप्पणियों के अपर्याप्त उत्तर, कम विघटनकारी विकल्पों पर विचार न करने, और नीति तथा उसके राष्ट्रीय‑सुरक्षा औचित्य के बीच कमजोर संबंध का हवाला दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह रोक मौजूदा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखती है, जिससे हजारों छात्रों, जिनमें से कई भारत और अन्य उच्च‑प्रवासी देशों से हैं, को व्यवधान से बचाया जाता है। यह प्रवासन नीति में कार्यकारी अतिक्रमण पर न्यायिक जांच का भी संकेत देता है।
“न्यायालय की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा के दावे को जाँचने में महत्वपूर्ण है, जो व्यापक इमिग्रेशन परिवर्तनों को सही ठहराने के लिए उपयोग किए जाते हैं,” कहते हैं डॉ. ए. शर्मा, कोलंबिया विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर।
हालांकि रोक अस्थायी है, सरकार इस निर्णय के खिलाफ अपील कर सकती है। अगली सुनवाई 2 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित है, जब न्यायालय यह विचार करेगा कि क्या नीति को संशोधनों के साथ फिर से लागू किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या यह रोक पहले से पंजीकृत पीएचडी कार्यक्रमों के छात्रों को प्रभावित करेगी?
A1: नहीं। चार वर्ष से अधिक अवधि वाले कार्यक्रमों में वर्तमान में पंजीकृत छात्र मौजूदा duration‑of‑status ढांचे के अंतर्गत रहते हैं जब तक कि रोक हटाई नहीं जाती।
Q2: क्या विदेशी पत्रकार अभी भी पुराने नियमों के तहत वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं?
A2: हाँ। यह रोक अधिकांश पत्रकारों के लिए 240 दिनों की पूर्व सीमा को बनाए रखती है, और नीति के अंतिम रूप देने तक कोई नई सीमा लागू नहीं की जाएगी।