असम के वन और पर्यावरण मंत्री जयंता मैलाबारुआह ने कहा कि फरवरी 12, 2016 तक, इन संरक्षित क्षेत्रों और आरक्षित वनों में अवैध कब्जे से 315,996.1251 हेक्टेयर ज़मीन पर कब्ज़ा हो गया था।

असम में 8 वन्यजीव अभयारण्यों और 281 आरक्षित वनों में अवैध कब्जा है। वन और पर्यावरण मंत्री जयंता मैलाबारुआह ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को 126 सदस्यीय विधानसभा में कहा, "असम में 315,996.1251 हेक्टेयर ज़मीन पर अवैध कब्जा हो गया है।" उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक 25,588.7675 हेक्टेयर ज़मीन से अवैध कब्जे वालों को हटाया है। इसमें पिछले 5 सालों में 16,937.2466 हेक्टेयर ज़मीन को हटाया गया है। बीजेपी ने 2016 में सरकार बनाई थी, जिससे कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हुआ। उन्होंने कहा कि सोनाई-रुपाई वन्यजीव अभयारण्य में 10,000 हेक्टेयर ज़मीन पर कब्जा है, जबकि मारत लोंग्री वन्यजीव अभयारण्य में 4,429 हेक्टेयर ज़मीन पर कब्जा है। लाकोघोवा वन्यजीव अभयारण्य में 11.7 हेक्टेयर ज़मीन पर कब्जा है। उन्होंने कहा कि 17,421.5 हेक्टेयर ज़मीन अभी भी वन्यजीव अभयारण्यों में और 296,717.935 हेक्टेयर ज़मीन आरक्षित वनों में कब्जे में है। उन्होंने कहा कि वन विभाग ने अब तक 2,531.2 हेक्टेयर ज़मीन पर पेड़ लगाए हैं। उन्होंने कहा कि असम की कुल वन क्षेत्र का क्षेत्रफल 78,438 वर्ग किलोमीटर में 36.1% है। उन्होंने कहा कि असम की कुल वन क्षेत्र का क्षेत्रफल 28,313.55 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 28,313.55 वर्ग किलोमीटर हो गया है। उन्होंने कहा कि असम में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति अभी भी जटिल है। उन्होंने कहा कि 2016 से 2026 के बीच मानव-हाथी संघर्ष में 1,150 लोगों की मौत हुई है। इनमें 53 लोग 2026 की पहली छमाही में मारे गए। उन्होंने कहा कि 2025 में 138 लोग मारे गए थे, जो 2016 में 98 लोगों की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि किसानों को इन संघर्षों के कारण 6,286 बीघा जमीन को नुकसान पहुंचा है, जबकि 8,084 बीघा जमीन को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि 2025 में किसानों को 3,519 बीघा जमीन को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि 246 हाथियों की मौत इन संघर्षों में हुई है। इनमें से अधिकांश हाथी के बिजली के तार से और ट्रेन के टक्कर से मारे गए हैं।