असम सरकार ने गुहात्ती में 271 इलेक्ट्रिक बसें चालू की थीं, पर लगातार कई टक्करें होने के बाद 63 ई‑बस ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। नई दिशा‑निर्देशों में हर हरे रंग की बस को बाएँ लेन में चलाने का आदेश है।

असम के मुख्य राजनैतिक अधिकारी ने आज घोषणा की कि गुहात्ती शहर में चल रहे 63 इलेक्ट्रिक बस ड्राइवरों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। यह कदम कई महीनों से चल रहे दुर्घटना श्रृंखला के बाद उठाया गया है, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा और वैध संचालन को लेकर गहरी चिंताएँ उभरी थीं।

पृष्ठभूमि और ई‑बस पहल

2022 में असम सरकार ने पर्यावरण‑संबंधी लक्ष्य को ध्यान में रखकर 271 इलेक्ट्रिक बसों की एक विस्तृत फ्लीट को गुहात्ती में परिचय कराया। इस पहल का उद्देश्य शहरी प्रदूषण को घटाना, पेट्रोल‑डिज़ेल वाहनों की निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ बनाना था। प्रारंभिक रिपोर्टें दर्शाती थीं कि नई बसें कम उत्सर्जन, कम संचालन लागत और यात्रियों के लिए आरामदायक यात्रा प्रदान कर रही थीं।

दुर्घटनाओं की लहर और प्रतिक्रिया

हालांकि, कई महीनों में दर्ज की गई टक्करें, ब्रेक फेल्योर और अनियमित ओवरटेकिंग ने इस नवाचार को धूमिल कर दिया। स्थानीय मीडिया ने रिपोर्ट किया कि इन दुर्घटनाओं में कई बार यात्रियों को चोटें आईं और कभी‑कभी बसें पूरी तरह से नष्ट हो गईं। जांच के बाद पता चला कि कई ड्राइवरों के पास आवश्यक प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं थे। इस बात ने राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

नए दिशा‑निर्देश और बाएँ लेन नीति

सरकार ने तुरंत एक नया डिक्री जारी किया, जिसमें सभी हरे रंग की इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर बाएँ लेन में चलना अनिवार्य कर दिया गया। इस नीति का उद्देश्य ट्रैफिक प्रवाह को व्यवस्थित करना, ब्रेकिंग दूरी को बढ़ाना और अनावश्यक टक्करें कम करना है। यह नियम शहर के ट्रैफिक प्रबंधन विभाग द्वारा कड़ी निगरानी के तहत लागू किया जाएगा, और उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों को भारी जुर्माना व लाइसेंस रद्द करने का सामना करना पड़ेगा।

आगे की राह और संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षा और सार्वजनिक भरोसा बहाल हो सकता है। साथ ही, यह कदम अन्य भारतीय शहरों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन के लिए एक मॉडल स्थापित कर सकता है। सरकार को अब ड्राइवर प्रशिक्षण, रूट प्लानिंग और रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम में निवेश बढ़ाना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी ही घटनाओं से बचा जा सके।

अंततः, गुहात्ती की यह कठोर कार्रवाई न केवल स्थानीय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, बल्कि भारत में सतत परिवहन नीति के विकास में एक महत्वपूर्ण सीख भी बनती है।