राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तिरुपट्टुर जिले के NH‑48 पर पाँच दुर्घटनाप्रवण बिंदुओं पर अंडरपास बनाने का प्रस्ताव रखा। प्रत्येक अंडरपास का खर्च लगभग 22 करोड़ रुपये होगा, जिससे पादचारी और वाहन चालकों की सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तिरुपट्टुर में पाँच ब्लैक स्पॉट पर अंडरपास बनेंगे
- प्रति अंडरपास अनुमानित लागत ₹22 करोड़
- हर बिंदु पर औसतन पाँच घातक दुर्घटनाएँ होती हैं
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तिरुपट्टुर जिले के चेंनई‑बेंगलुरु हाईवे (NH‑48) पर पाँच पहचान‑प्राप्त ब्लैक स्पॉट पर अंडरपास बनाने की योजना घोषित की है। यह कदम उन जगहों पर गति‑सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है जहाँ नियमित रूप से घातक दुर्घटनाएँ होती रही हैं।
ब्लैक स्पॉट की पहचान और वर्तमान स्थिति
कृष्णागिरी‑तिरुपट्टुर के बीच लगभग ६५ किमी की दूरी पर पंचूर गांव, वेल्लाकाल नाथम‑चेतेरी जंक्शन, मल्लापली जंक्शन, नत्रम्पली और वनीयंबदी‑वालयापत्ति जंक्शन को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। जिला कलेक्टर जी. रविकुमार की निरीक्षण यात्रा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इन चौराहों पर औसतन पाँच घातक दुर्घटनाएँ नियमित अंतराल पर होती हैं, मुख्यतः पैदल यात्रियों और पशुपालकों की।
अंडरपास निर्माण का विवरण
प्रत्येक अंडरपास की न्यूनतम ऊँचाई 4.5 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर होगी, जिससे दो‑तरफा ट्रैफ़िक को बिना रुकावट के गुजरने की सुविधा मिलेगी। अनुमानित निर्माण लागत ₹22 करोड़ प्रति अंडरपास है और कार्य अवधि १८ महीने निर्धारित की गई है। वर्तमान में वालजाह (रानीपेट) से कृष्णागिरी तक 148 किमी के मार्ग पर 20 से अधिक अंडरपास मौजूद हैं, जो इस नई पहल की तकनीकी व्यवहार्यता को सिद्ध करते हैं।
अस्थायी उपाय और जागरूकता अभियान
अंडरपास की शुरुआत से पहले, कलेक्टर रविकुमार ने NHAI को चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, ब्लिंकिंग लाइट और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित पारगमन मार्ग स्थापित करने का निर्देश दिया। साथ ही आसपास के गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर अनधिकृत जंक्शन पार करने को रोका जाएगा।
स्थानीय समुदाय और ड्राइवरों की प्रतिक्रिया
स्थानीय किसान, जो अपने पशुधन को चराने के लिए अक्सर राजमार्ग पार करते हैं, इस कदम को जीवन‑रक्षा मानते हैं। मोटरिस्ट र. पवन ने कहा, “अंडरपास न केवल पादचरणियों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि तेज गति वाले वाहनों को भी सहजता से गुजरने में मदद करेगा। रात के समय उचित प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य है।”
समग्र रूप में, यह पहल राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा मानकों को उन्नत करने, दुर्घटनाओं की संख्या घटाने और आर्थिक एवं सामाजिक लागत को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।