रायपुर कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी को E20‑अनुपालन ग्रैंड विटारा बदलने या पूरी रक़म लौटाने का आदेश दिया। कंपनी ने इस फैसले में तथ्यात्मक त्रुटियों का हवाला देते हुए अपील दायर करने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रायपुर कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी को नई E20‑अनुपालन कार या ₹20.5 लाख की पूरी रिफंड देने का आदेश दिया।
- कंपनी ने कहा कि वाहन पूरी तरह से E20‑संगत था और कोर्ट के आदेश में कई तथ्य छूट गये हैं।
- मारुति ने इस निर्णय को उच्च न्यायालय में अपील करने का इरादा जताया, जिससे भविष्य में ई‑फ्यूल मानकों पर कानूनी दिशा‑निर्देश बदल सकते हैं।
मारुति सुजुकी ने हाल ही में रायपुर कंज्यूमर कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने का इरादा जाहिर किया है। यह फैसला तब आया जब एक उपभोक्ता, डॉ. प्रेमराज डेब्ता, ने ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस वेरिएंट खरीदा था, जिसे E20 इथेनॉल‑ब्लेंडेड पेट्रोल के साथ विज्ञापित किया गया था। लेकिन कई बार कार के इंजन में गड़बड़ी, डैशबोर्ड पर “इंजन मालफ़ंक्शन” संकेत, तथा मिलावटी पेट्रोल के कारण होने वाले नुकसान की शिकायतें दर्ज हुईं।
पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया
डॉ. डेब्ता ने बताया कि 11 नवंबर 2024 को उनकी कार में अचानक खराबी आई, जिसके बाद डीलरशिप ने कहा कि समस्या मिलावटी पेट्रोल के कारण है। उन्होंने पेट्रोल पंप पर शिकायत दर्ज की, लेकिन पंप ने कहा कि उनके ईंधन में कोई समस्या नहीं है। अंततः, कार को कई बार वर्कशॉप में ले जाया गया, जहाँ मरम्मत का अनुमान ₹5.30 लाख आया, जो वारंटी में शामिल नहीं था। उपभोक्ता ने इस निरंतर असुविधा को कोर्ट तक पहुँचाया, जहाँ रायपुर कंज्यूमर कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
कोर्ट का आदेश
न्यायालय ने मारुति सुजुकी को दो विकल्पों में से एक चुनने का निर्देश दिया: (i) ग्राहक को नई E20‑अनुपालन ग्रैंड विटारा प्रदान करना, या (ii) पूरी खरीद राशि लगभग ₹20.5 लाख वापस करना। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा के लिए ₹1 लाख तथा कानूनी खर्च के लिए ₹10,000 का मुआवजा भी देना आदेशित किया गया।
मारुति की प्रतिक्रिया
मारुति सुजुकी ने कहा कि वाहन पूरी तरह से E20‑संगत था और इस संबंध में सभी जानकारी यूज़र मैनुअल में स्पष्ट रूप से दी गई थी। कंपनी ने यह भी कहा कि कोर्ट के आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्य नहीं दिखे, जैसे कि मिलावटी ईंधन की रिपोर्ट और वास्तविक उत्पादन तिथि। इस आधार पर, कंपनी ने निर्णय को उच्च न्यायालय में अपील करने का इरादा जताया है, जिससे यह मामला आगे भी कानूनी जाँच का विषय बना रहेगा।
भविष्य के प्रभाव
यदि मारुति की अपील सफल होती है, तो यह भारत में इथेनॉल‑ब्लेंडेड ईंधन (E20) के नियमन और ऑटोमोबाइल निर्माताओं की जिम्मेदारी पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। उपभोक्ता संरक्षण के लिए यह मामला एक मिसाल बन सकता है, जबकि ऑटो उद्योग को ईंधन मानकों के अनुपालन में अधिक पारदर्शिता अपनाने के लिये प्रेरित कर सकता है।