वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में 53.3% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें कुल बिक्री 9.71 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई। इस बाजार वृद्धि में से लगभग 96% हिस्सेदारी टीवीएस, बजाज, हीरो विडा और एथर एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियों के नाम रही, जिससे स्टार्टअप्स की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जनवरी से जून 2026 के बीच भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में 53.3% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
- इस अवधि में कुल 9,70,993 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 6,33,599 था।
- बाजार में हुई इस नई बढ़ोतरी (3.37 लाख यूनिट्स) में से 95.6% हिस्सेदारी केवल टीवीएस, बजाज, एथर और हीरो विडा की रही।
- ओला इलेक्ट्रिक की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है, जिसने इस अवधि में केवल 68,148 यूनिट्स बेचीं।
भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली छमाही (H1 2026) में इस सेक्टर ने 53.3% की अभूतपूर्व वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान देश में कुल 9,70,993 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे गए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में बेचे गए 6,33,599 वाहनों की तुलना में काफी अधिक हैं। हालांकि, इस पूरी विकास गाथा में सबसे दिलचस्प पहलू पारंपरिक ऑटोमोबाइल दिग्गजों की बाजार पर मजबूत होती पकड़ है।
दिग्गज कंपनियों का बाजार पर एकतरफा नियंत्रण
इस साल बाजार में जो लगभग 3.37 लाख अतिरिक्त वाहनों की बिक्री हुई है, उनमें से 95.6% यानी 3,22,621 यूनिट्स का योगदान केवल चार बड़ी कंपनियों—TVS Motor, Bajaj Auto, Hero Vida और Ather Energy ने दिया है। इन कंपनियों ने न केवल अपनी बिक्री बढ़ाई है, बल्कि समग्र बाजार हिस्सेदारी में 75% से अधिक का योगदान देकर खुद को स्थापित किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो टीवीएस ने 2.6 लाख से अधिक, बजाज ऑटो ने 2.25 लाख, एथर ने 1.74 लाख और हीरो विडा ने 1.09 लाख से अधिक वाहन बेचे हैं।
स्टार्टअप्स के लिए खतरे की घंटी, ओला इलेक्ट्रिक की रफ्तार हुई धीमी
एक समय भारतीय ईवी क्रांति की अगुवाई करने वाली कंपनी Ola Electric के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इस साल की पहली छमाही में कंपनी केवल 68,148 यूनिट्स ही बेच पाई है, जिससे इसकी बाजार हिस्सेदारी में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सेवा संबंधी समस्याओं, गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों और मजबूत ऑफलाइन डीलरशिप नेटवर्क की कमी ने स्टार्टअप्स को नुकसान पहुंचाया है। इसके विपरीत, ग्रीव्स ऑटो (45,240 यूनिट्स), रिवर (22,490 यूनिट्स) और बीगौस ऑटो (20,276 यूनिट्स) जैसी कंपनियां भी बाजार में अपनी जमीन तलाशने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
पारंपरिक विनिर्माताओं की सफलता के पीछे के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि टीवीएस, बजाज और हीरो जैसे स्थापित ब्रांड्स की सफलता के पीछे उनका दशकों पुराना मजबूत डीलरशिप नेटवर्क, उत्कृष्ट ग्राहक सेवा और भरोसेमंद विनिर्माण क्षमता है। जब भारतीय उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं, तो वे तकनीकी तामझाम से अधिक विश्वसनीयता और सर्विस सपोर्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में इन स्थापित कंपनियों द्वारा किया जा रहा निवेश भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है।