नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आने वाले हवाई अड्डा निजीकरण में एक बिडर को अधिकतम तीन बंडल मिलने की सीमा तय की है। यह कदम बाजार में एकाधिकार और अत्यधिक लेवरेज के जोखिम को कम करने के लिए उठाया गया है।

  • बिडर को अधिकतम 3 बंडल मिलेंगे
  • बंडलिंग से छोटे हवाई अड्डे को बड़े के साथ जोड़ा जाएगा
  • क्रॉस‑सेक्टोरल इंफ़्रास्ट्रक्चर अनुभव वाले बिडर भी भाग ले सकेंगे

नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) को सौंपे प्रस्ताव में बताया कि अगले निजीकरण दौर में एक ही बोलीदाता को अधिकतम तीन बंडल हवाई अड्डे आवंटित किए जाएंगे। यह कदम विमानन क्षेत्र में ओलिगोपोली की चिंता को दूर करने और अत्यधिक लेवरेज के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से है।

PPPAC के अध्यक्ष और आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव, अनुराधा ठाकुर ने 4 अगस्त को हुई बैठक में इस उपाय के बारे में पूछताछ की थी। मंत्रालय ने जवाब दिया कि बंडलिंग की मोडालिटीज़ को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसे अंतिम सिफ़ारिश के लिए PPPAC को प्रस्तुत किया जाएगा।

Historical Background

2019 के पहले निजीकरण दौर में अडानी समूह ने सभी छह उपलब्ध हवाई अड्डे जीत लिए थे, जिससे उद्योग में दो प्रमुख समूह – अडानी और जीएमआर – का प्रभुत्व स्थापित हो गया। वर्तमान में अडानी समूह आठ हवाई अड्डे संचालित करता है, जबकि जीएमआर छह हवाई अड्डे संचालित करता है। इस एकाधिकारात्मक संरचना ने कई बार नीति निर्माताओं को चिंतित किया है।

नए दौर में 11 हवाई अड्डे पाँच बंडलों में पेश किए जाएंगे: अमृतसर‑कांगड़ा, रायपुर‑औरंगाबाद, भुबनेश्वर‑हब्बली, तिरुचिरापली‑तिरुपति, और वाराणसी‑गया‑कुशीनगर। ये बंडल बड़े, राजस्व‑स्रावक हवाई अड्डों को छोटे, घाटे‑उठाने वाले हवाई अड्डों के साथ जोड़ते हैं, जिससे क्रॉस‑सब्सिडी संभव हो सके।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि बंडलिंग को सीमित करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, नई कंपनियों को प्रवेश का अवसर मिलेगा और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी। यह नीति भारत के विमानन बुनियादी ढांचे को विविधीकृत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

"हवाई अड्डा बंडलिंग को सीमित करना उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा और जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करेगा," कहा वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. अंजू सिंह ने।
Did You Know?: अडानी समूह ने 2019 में सभी निजीकरण के हवाई अड्डे जीत कर भारत के हवाई अड्डा संचालन में 60% से अधिक हिस्सेदारी हासिल कर ली थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस नई नीति से छोटे हवाई अड्डों को सुधार का लाभ मिलेगा?

उत्तर: हाँ, बड़े हवाई अड्डों के राजस्व से छोटे हवाई अड्डों की वित्तीय स्थिति सुधारने की संभावना है।

प्रश्न 2: कौनसे बिडर अब इस निजीकरण में भाग ले सकते हैं?

उत्तर: केवल विमानन क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अनुभवी बिडर भी भाग ले सकते हैं, बशर्ते उनके पास सामंजस्यपूर्ण तकनीकी अनुभव हो।