জয় কৃষক সংগঠন থেকে অমিত ভাটনাগর ১৮ দিন ধরে কেন-বেতওয়া নদী লিঙ্ক প্রকল্পের বিরোধে উপবাসে ছিলেন। চতরপুর ও পন্না জেলায় কর্মীদের সঙ্গে তিনি ৪ জুলাই থেকে নোউস বাঁধা এবং নৌকার উপর শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শয্যায় শজা।

অমিত ভাটনাগর ২৩ জুলাই চতরপুর জেলার হাসপাতালের সামনে তার উপবাস শেষ করেন, যখন সরকার প্রকল্পে বাদ পড়া পরিবারগুলোকে পুনরায় যাচাই করার প্রতিশ্রুতি দেয়। তিনি বলেন, এই সিদ্ধান্তটি তার মা ও প্রস্তাবিত নারীদের অনুরোধে নেওয়া হয়েছে, যারা ১৯ জুলাই থেকে খাবার বন্ধ করে রেখেছিলেন।

ভাটনাগর তার ভবিষ্যৎ পরিকল্পনা ঘোষণা করেন, যেখানে তিনি ‘ন্যায় সত্যাগ্রহ’ চালিয়ে যাবেন এবং অবহেলিত সকল পরিবারের ন্যায় বিচার নিশ্চিত করার জন্য চলমান পর্যবেক্ষণ করবেন। তিনি হাসপাতালের পর্যবেক্ষণে থাকবেন।

मुख्य बिंदु

  • अमित भटनागर ने 18‑दिन का उपवास समाप्त किया
  • सरकार ने प्रभावित परिवारों की नई जाँच का आश्वासन दिया
  • प्रदर्शन ‘न्याय सत्याग्राह’ के रूप में जारी रहेगा

उपवास का अंत और तत्काल कारण

जै किसान संघ के प्रमुख अमित भटनागर ने 23 जुलाई को छतरपुर जिला अस्पताल में नारियल पानी पीकर अपना 18‑दिन का अनिश्चितकालीन उपवास तोड़ दिया। यह निर्णय उन्होंने तब लिया जब कई जनजातीय महिलाएँ 19 जुलाई से अपना भोजन रोक चुकी थीं, और पुलिस ने उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया था।

केन‑बेतेवा लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध की पृष्ठभूमि

छतरपुर और पन्ना जिलों के लोग 4 जुलाई से केंद्र सरकार के ₹44,000 करोड़ के केन‑बेतेवा नदी लिंक परियोजना के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने अपनी गर्दन में फंदे बांधकर, नदी में अस्थायी चिता पर लेटकर विरोध किया, जिससे परियोजना के पुनर्वास में छूटे लोगों को बेहतर मुआवजा मिल सके।

सरकारी प्रतिक्रिया और नई जाँच प्रक्रिया

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि प्रशासन ने भटनागर और अन्य प्रदर्शनकारियों से लगातार संवाद किया है और सभी शिकायतों को संबोधित करने के लिए एक टीम बनाई जाएगी। नई जाँच में उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जिन्हें पहले पुनर्वास प्रक्रिया से बाहर रखा गया था।

भविष्य की रणनीति: ‘न्याय सत्याग्राह’

भटनागर ने कहा, “मैं आज अपना उपवास समाप्त कर रहा हूँ, लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ। मैं ‘न्याय सत्याग्राह’ शुरू करूँगा और अंतिम प्रभावित व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने के लिए लड़ाई जारी रखूँगा।” वह ग्रामीण स्तर पर यात्रा करके आंदोलन को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं।

Historical Background

केन‑बेतेवा लिंक परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जल संसाधनों को जोड़ना है, जिससे जल अभाव वाले क्षेत्रों में सिंचाई और जल आपूर्ति सुधरे। हालांकि, योजना को पर्यावरणीय चिंताओं और जनजातीय पुनर्वास के मुद्दों पर कई बार विरोध का सामना करना पड़ा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the resolution of this protest could set a precedent for how large‑scale infrastructure projects handle tribal rehabilitation and compensation across India.

"जनजातियों का न्याय सुनिश्चित करना भारत में सतत विकास की कुंजी है," कहा सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर राधिका सिंह।
Did You Know?: केन‑बेतेवा परियोजना में कुल 28 बांध और 1,500 किलोमीटर से अधिक जलवाहिनी शामिल हैं।

Frequently Asked Questions

  • प्रश्न: क्या केन‑बेतेवा परियोजना अभी भी जारी है?
    उत्तर: हाँ, परियोजना का कार्यान्वयन जारी है, लेकिन पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया में सुधार की मांग की जा रही है।
  • प्रश्न: अमित भटनागर का अगला कदम क्या होगा?
    उत्तर: वह ग्रामीण स्तर पर यात्रा करके ‘न्याय सत्याग्राह’ का नेतृत्व करेंगे और प्रशासन की प्रतिबद्धताओं की निगरानी करेंगे।