तेलंगाना राज्य परिवहन निगम (TGSRTC) ने 118 JBM इलेक्ट्रिक बसों को फिटनेस प्रमाणपत्र प्रदान किया, जिससे अब कुल 268 बसें सड़कों पर चलने को तैयार हैं। बैटरी संबंधी चिंताओं के बाद हुई यह मंज़ूरी यात्रियों को बेहतर सेवा सुनिश्चित करेगी।

हैदराबाद – तेलंगाना राज्य रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (TGSRTC) ने बुधवार को 118 JBM इलेक्ट्रिक बसों को संचालन योग्य घोषित किया, जिससे राज्य की इलेक्ट्रिक बस फ्लीट में फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाली कुल संख्या 268 तक पहुँच गई। यह कदम पिछले कुछ हफ्तों में बैटरी संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ बसों को सड़कों से हटाने के बाद आया।

तकनीकी निरीक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

बुस भवन में स्थापित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की तकनीकी टीम ने JBM के प्रतिनिधियों और चीन से आए बैटरी विशेषज्ञों के साथ मिलकर विस्तृत निरीक्षण किया। इस संयुक्त जांच में बैटरी मॉड्यूल, चार्जिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक मोटर की कार्यक्षमता की पुष्टि की गई। कुल 500 JBM इलेक्ट्रिक बसों में से 150 पहले ही फिटनेस क्लियरेंस प्राप्त कर सेवा में लौट चुकी थीं, जबकि शेष 118 को आज मंज़ूरी मिली।

भविष्य की योजना और त्वरित पुनःप्रवेश

अधिकांश शेष बसों का निरीक्षण जारी है और अधिकारियों का अनुमान है कि अगले दो‑तीन दिनों में वे भी फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेंगे। TGSRTC के मैनेजिंग डायरेक्टर वाई. नागी रेड्डी ने क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिया है कि जहाँ JBM बसें उपलब्ध न हों, वहाँ अतिरिक्त बस सेवाएँ चलाकर यात्रियों को असुविधा न हो। यह रणनीति विशेष रूप से इंटर‑डिस्ट्रिक्ट मार्गों पर महत्वपूर्ण है, जहाँ इन इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग प्रमुखता से होता है।

इलेक्ट्रिक बसों का सामाजिक‑आर्थिक प्रभाव

ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने से न केवल प्रदूषण में कमी आती है, बल्कि दीर्घकालिक ईंधन लागत में भी बचत होती है। तेलंगाना ने 2020 में 1,050 इलेक्ट्रिक बसों की लक्ष्य निर्धारित की थी; वर्तमान में 500 JBM मॉडल और अन्य निर्माताओं की मिलीजुली फ्लीट इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैटरी तकनीक में निरंतर सुधार और स्थानीय चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया गया, तो सार्वजनिक परिवहन का कार्बन फुटप्रिंट काफी घटाया जा सकता है।

आगे की चुनौतियाँ और नीति‑निर्देश

भले ही 118 बसों की मंज़ूरी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन TGSRTC को अभी भी बैटरी लाइफ़साइकल, रखरखाव लागत और चार्जिंग नेटवर्क की विश्वसनीयता को लेकर सतर्क रहना होगा। राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति में सब्सिडी, टैक्स रियायत और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उपायों को शामिल किया है, जो भविष्य में फ्लीट को और विस्तारित करने में मददगार सिद्ध हो सकते हैं।