केरल के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मारुति सुज़ुकी को एयरबैग न खुलने के कारण ग्राहक को कुल 4.1 लाख रुपये देने का आदेश दिया। यह फैसला वाहन सुरक्षा एवं उपभोक्ता अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल के उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुज़ुकी को 4.1 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया।
  • घटना में एयरबैग न खुलना ‘इंजीनियरिंग विफलता’ माना गया।
  • निर्णय वाहन सुरक्षा मानकों और भविष्य के उपभोक्ता दावों पर प्रभाव डालेगा।

केरल राज्य के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, कासरागोढ़ ने मारुति सुज़ुकी इंडिया को कुल 4.1 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। यह आदेश तब आया जब एक ग्राहक ने शिकायत की थी कि उनके वाहन की एयरबैग टक्कर के समय नहीं खुली, जिससे सुरक्षा के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगा।

घटना का विवरण

शिकायतकर्ता के अनुसार, वह और उनके साले ने अपनी मारुति कार को एक एम्बुलेंस से टकराने के बाद गंभीर टक्कर का सामना किया। दोनों ने कोई शारीरिक चोट नहीं लगने के बावजूद, वाहन के सामने के हिस्से में व्यापक क्षति हुई। टक्कर की तीव्रता को देखते हुए, एयरबैग को स्वतः सक्रिय होना चाहिए था, परंतु ऐसा नहीं हुआ। इस कारण ग्राहक ने कार के समान मूल्य वाला नया वाहन या 10 लाख रुपये की पूरी रिफंड की मांग की, साथ ही 5 लाख रुपये की सेवा कमी, मानसिक कष्ट और मुकदमे की लागत के लिए अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का दावा किया।

मारुति सुज़ुकी का जवाब

मारुति सुज़ुकी ने अपनी रक्षा में कहा कि टक्कर साइड इम्पैक्ट थी, न कि फ्रंटल इम्पैक्ट, और एयरबैग सेंसर ने डिप्लॉयमेंट के लिए पर्याप्त संकेत नहीं प्राप्त किया। कंपनी ने कहा कि वाहन के एयरबैग सिस्टम में कोई उत्पादन दोष नहीं है और जांच से कोई असामान्यता नहीं मिली। इस प्रकार, उन्होंने ग्राहक की मांगों को खारिज किया।

उपभोक्ता आयोग का निर्णय

आयोग ने दोनों पक्षों के प्रस्तुत साक्ष्य की गहन जाँच के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि टक्कर की तीव्रता एयरबैग के सक्रिय होने के लिये पर्याप्त थी, परंतु सिस्टम ने कार्य नहीं किया। आयोग ने इसे “इंजीनियरिंग की कुल विफलता” कहा और कहा कि एयरबैग की खराबी SRS कंट्रोल मॉड्यूल, एयरबैग मॉड्यूल या इम्पैक्ट सेंसर में हो सकती है। ग्राहक को 3 लाख रुपये के साथ 1.10 लाख रुपये का मानसिक कष्ट एवं मुकदमे की लागत के लिए अतिरिक्त भुगतान किया गया।

भविष्य के प्रभाव

यह फैसला भारतीय उपभोक्ता कानून में वाहन सुरक्षा के मानकों को सख्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निर्माता कंपनियों को अब एयरबैग सिस्टम की विश्वसनीयता पर अधिक कठोर परीक्षण करने की आवश्यकता होगी, ताकि भविष्य में समान शिकायतों से बचा जा सके। साथ ही, इस निर्णय से उपभोक्ताओं को यह संदेश मिलता है कि सुरक्षा मानकों में चूक के लिये कानूनी कार्रवाई संभव है।