दिल्ली सरकार महिला यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाते हुए 50 नई महिला‑विशेष बसें लॉन्च करेगी। इन बसों में सभी‑महिला स्टाफ, पैनिक बटन और इलेक्ट्रिक तकनीक शामिल होगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन में नया मानक स्थापित होगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • लगभग 50 नई महिला‑विशेष बसें जो सभी‑महिला स्टाफ और पैनिक बटन से सुसज्जित होंगी
  • बसेँ 20‑25 व्यस्त मार्गों पर चलेंगी, जिसमें बाहरी दिल्ली और विश्वविद्यालय क्षेत्रों को प्राथमिकता
  • नई बसें PM‑E‑DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे 2028‑29 तक 14,000 बसों का लक्ष्य तेज़ होगा

दिल्ली सरकार ने महिला यात्रियों की सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए अपनी लेडीज स्पेशल बस सेवा का व्यापक विस्तार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत कुल 50 नई बसें जो केवल महिलाओं के लिए होंगी, विभिन्न प्रमुख मार्गों पर चलाने की योजना है। इन बसों में सभी‑महिला चालक, मार्शल, सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

पृष्ठभूमि और इतिहास

यह सेवा पहली बार कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन तब केवल दो प्रमुख रूटों पर ही सीमित थी। समय‑समय पर विशेष अनुरोधों के आधार पर इनका संचालन किया जाता रहा। अब डीलाइट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) इस योजना को संरचित रूप में लागू करने, सुरक्षा मानकों को उन्नत करने और महिलाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से विस्तारित कर रहा है।

विस्तार की रूपरेखा

सरकार ने 20‑25 व्यस्त रूटों को चुना है, जिनमें सेंट्रल दिल्ली, ITO, प्रमुख कॉलेजों और कार्यालयों के आसपास के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन रूटों में मेट्रो कनेक्टिविटी सीमित होने के कारण महिलाओं और छात्राओं को बेहतर लास्ट‑माइल कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। बसें सुबह 5 बजे से लेकर रात 11‑12 बजे तक चलेंगी, जिससे काम‑काज और पढ़ाई के समय सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।

नई बसें PM‑E‑DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के रूप में खरीदी जाएँगी, जिससे दिल्ली के 2028‑29 तक 14,000 बसों के लक्ष्य को तेज़ी से प्राप्त किया जा सके। प्रारम्भिक चरण में 25 बसें बाहरी दिल्ली में और 25 विश्वविद्यालय विशेष बसें के रूप में तैनात की जाएँगी। साथ ही, Saheli Pink Smart Card के उपयोग का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे ऐसी जड़ें पहचानी जा सकें जहाँ महिला‑केवल सेवा की मांग अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक मोड में तेजी से बदलने की राष्ट्रीय नीति के साथ भी संरेखित करेगा। यदि सफलता मिले तो यह मॉडल अन्य महानगरों में भी दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर महिला‑सुरक्षित ट्रांसपोर्ट का मानक स्थापित हो सकता है।