बॉलीवुड की प्लस‑साइज़ अभिनेत्री अंजलि आनंद ने स्क्रीन के साथ अपने संघर्षों को बख़ूबी बताया। उन्होंने ‘बेल बॉटम’, ‘रॉकी और रानी की प्रीम कहानी’ और ‘धमाल 4’ में मिलने वाले बॉडी‑शेमिंग रोल्स पर प्रकाश डाला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अंजलि का पहला बड़ा फिल्म रोल ‘बेल बॉटम’ में केवल कॉमिक सीन के लिए था।
  • ‘रॉकी और रानी की प्रीम कहानी’ में उन्होंने बॉडी‑शेमिंग के खिलाफ आवाज़ उठाई।
  • प्लस‑साइज़ अभिनेताओं को अभी भी सीमित किरदारों में बंधा देखा जा रहा है।

बॉलीवुड की स्क्रीन पर प्लस‑साइज़ कलाकारों की स्थिति अक्सर कॉमिक राहत तक सीमित रह गई है, ऐसा दावा अभिनेत्री अंजलि आनंद ने एक विशेष साक्षात्कार में किया। टेलीविजन से कदम आगे बढ़कर अंजलि ने 2024 में अक्षय कुमार की ‘बेल बॉटम’ में अपना पहला फिल्मीय प्रवेश किया, जहाँ उनका किरदार केवल एक आतंकवादी को गिराने के लिए इस्तेमाल किया गया। “मैं ‘बेल बॉटम’ में इसलिए थी कि एक आतंकवादी मेरे ऊपर गिर सके और पकड़ा जा सके,” वह बताती हैं, जो इस बात को उजागर करता है कि उनके शारीरिक आकार को किस तरह से सीनिक उपयोग के लिए चुना जाता है।

प्लस‑साइज़ अभिनेताओं की स्टीरियोटाइपिंग

अंजलि का कहना है कि “ऐसे रोल्स मुझे मेरे वजन के कारण मिलते हैं, न कि मेरे अभिनय कौशल के आधार पर।” वह इस बात पर ज़ोर देती हैं कि भारतीय सिनेमा में अक्सर केवल शारीरिक दिखावट को ही मापदंड माना जाता है, जबकि दीपिका पादुकोण या आयश्वरी राय जैसे सितारे भी इसी तरह की आलोचनाओं का सामना करते रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने शाहरुख़ खान और अमिताभ बच्चन के उदाहरण भी पेश किए, जो दर्शाते हैं कि बॉडी‑शेमिंग का दायरा केवल नई पीढ़ी तक सीमित नहीं है।

‘रॉकी और रानी की प्रीम कहानी’ में बदलाव

‘रॉकी और रानी की प्रीम कहानी’ में अंजलि का किरदार पहली बार स्क्रीन पर बॉडी‑शेमिंग के खिलाफ स्पष्ट रूप से खड़ा हुआ। उन्होंने कहा, “पहले एक फुल‑फिगर लड़की सिर्फ खाने‑पीने के मज़ाक में दिखती थी, लेकिन अब उसे आवाज़ मिल रही है।” इस फिल्म ने न केवल उनके करियर को नई दिशा दी, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग में प्लस‑साइज़ किरदारों के प्रति दृष्टिकोण को भी चुनौती दी। फिर भी अंजलि मानती हैं कि यह बदलाव “एक बॉक्स” में फँसाने का नया रूप है, जिसे वह ‘डब्बा कार्टेल’ और ‘रात जवान है’ जैसे प्रोजेक्ट्स से तोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

धमाल 4 में आलोचना और ऑनलाइन ट्रोलिंग

‘धमाल 4’ में कई फेट‑शेमिंग चुटकुले शामिल होने के कारण अंजलि को फिर से ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “समाज अभी भी मेरे जैसे कलाकारों को मज़ाक बनाता है, चाहे मैंने कितनी भी मेहनत कर ली हो।” यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि दर्शकों की सोच में परिवर्तन के बिना स्क्रिप्ट में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती।

अंजलि का संदेश स्पष्ट है: “जब तक समाज बदलता नहीं, तब तक सिनेमा में वास्तविक परिवर्तन की संभावना कम है।” उनका संघर्ष न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि पूरे प्लस‑साइज़ कलाकारों के अधिकारों की लड़ाई को दर्शाता है।