चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) अब ₹3,500 करोड़ की बकाया देनदारी के कारण कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को रद्द या स्थगित करने की सोच रहा है। इसमें ग्लोबल स्पोर्ट्स सिटी, समुद्र‑तट विकास और वादा चेन्नई विकास योजना शामिल हैं।

चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) ने हालिया स्रोतों के अनुसार लगभग ₹3,500 करोड़ की बकाया देनदारी को संभालते हुए कई प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को रद्द या स्थगित करने का प्रस्ताव रखा है। यह निर्णय वित्तीय दबाव को कम करने और मौजूदा परियोजनाओं के संचालन‑रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

मुख्य कारण: निर्माण, भूमि अधिग्रहण और वादा चेन्नई विकास योजना

CMDA की देनदारियों का बड़ा हिस्सा निर्माण कार्य, भूमि अधिग्रहण (लगभग ₹1,500 करोड़) और वादा चेन्नई वैलरची थित्तम (₹1,000 करोड़) से उत्पन्न हुआ है। इस योजना का उद्देश्य दक्षिण चेन्नई के वार्षिक जल‑स्रोत को पुनर्स्थापित करना था, परन्तु लागत अनुमान और कार्यान्वयन में कई अनपेक्षित खर्चे जुड़ गए।

रद्द किए जाने वाले प्रमुख प्रोजेक्ट

ग्लोबल स्पोर्ट्स सिटी, जिसे फरवरी 2026 में पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आधारशिला रखी थी, अब तमिलनाडु खेल विकास प्राधिकरण को सौंपा जाएगा। 127 एकड़ में स्थित इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹261 करोड़ थी। साथ ही, समुद्र‑तट विकास के कई हिस्से—मरिना से बेज़ेंट नगर, एलियट्स बीच से नीलंकरी तक—को भी स्थगित किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में पर्यावरणीय चिंताएँ, विशेषकर कछुए के अंडे देने वाले तट, भी प्रमुख कारण बन गई हैं।

वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति

CMDA के भीतर एक स्रोत ने कहा, “CMDA ने कई कार्यों को वित्तीय बोझ को समझे बिना शुरू किया, और वर्तमान स्थिति में नई परियोजनाएँ नहीं ले सकता।” प्राधिकरण अब बाहरी उधारी और राज्य सरकार से अतिरिक्त समर्थन की तलाश कर रहा है, जबकि मुंबई और हैदराबाद जैसी मेट्रो शहरों को मिलने वाले सरकारी सहयोग की तुलना में यह असमानता स्पष्ट है।

स्थानीय निकायों की भूमिका और संभावित समाधान

वर्तमान में पूर्ण हुए प्रोजेक्ट जैसे एम.एस. स्वामीनाथन वेटलैंड इको पार्क और रेट्टेरी जंक्शन की एयर‑कंडीशन्ड बस स्टैंड की रखरखाव जिम्मेदारी ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन को सौंप दी जाएगी। यह मॉडल भविष्य में अन्य निकट‑समाप्त प्रोजेक्ट्स के लिए भी अपनाया जाएगा। साथ ही, भूमि‑पूलिंग योजना (थिरुमाज़ी और मदंबक्कम्) भी वित्तीय एवं कानूनी अड़चनें झेल रही हैं, जिससे इन योजनाओं की प्रगति में देरी हो रही है।

प्रभाव और आगे का मार्ग

यदि ये रद्दीकरण आधिकारिक हो जाते हैं, तो चेन्नई की शहरी विकास गति धीमी पड़ सकती है, परन्तु वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक कदम माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि CMDA को दीर्घकालिक राजस्व मॉडल, जैसे नगर निगम बांड और परियोजना‑आधारित टिकटिंग, अपनाना होगा ताकि भविष्य में समान संकट से बचा जा सके।