उत्तर प्रदेश ने 6 जुलाई को स्टार्टअप पॉलिसी 2026 को मंजूरी दी, जिसमें AI, रोबोटिक्स और एयरोस्पेस जैसे डीप‑टेक सेक्टरों को प्रमुखता दी गई है। नीति के तहत 1,000 करोड़ रुपये का फंड, बीज पूँजी और विशेष सब्सिडी जैसी वित्तीय मददें दी जाएँगी, जिससे राज्य को 2030 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य साकार हो सके।

उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने 6 जुलाई को स्टार्टअप पॉलिसी 2026 को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी, जो राज्य के उद्यमी इकोसिस्टम को तेज़ी से विकसित करने के उद्देश्य से कई वित्तीय प्रोत्साहन और संस्थागत सुधार पेश करती है। यह नीति मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तैयार की गई है और 2030 तक राज्य को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के व्यापक विज़न के साथ संरेखित है।

नीति के प्रमुख प्रावधान

नई नीति में शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को अधिकतम 15 लाख रुपये की बीज पूँजी, रणनीतिक महत्व वाले प्रोजेक्ट्स को 50 लाख रुपये तक की सहायता, तथा एक ₹1,000 करोड़ का विशेष स्टार्टअप फंड स्थापित किया गया है। चयनित स्टार्टअप्स को दो साल तक प्रति माह ₹20,000 का जीवन यापन भत्ता, प्रोटोटाइप विकास के लिए ₹10 लाख तक का ग्रांट, और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं के लिए वार्षिक ₹2 लाख तक की प्रतिपूर्ति मिलेगी।

दीप‑टेक इकोसिस्टम पर विशेष फोकस

नीति का सबसे उल्लेखनीय पहलू AI, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए दीर्घकालिक ₹100 करोड़ की रोगी पूँजी सहायता है। यह कदम उत्तर प्रदेश को भारत के प्रमुख डीप‑टेक हब के रूप में स्थापित करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संस्थागत बदलाव और समावेशी उद्यमिता

एक नई स्वायत्त संस्था, UP स्टार्टअप मिशन, को राज्य के सभी स्टार्टअप पहलों का समन्वय करने के लिए स्थापित किया जाएगा, जो पहले के UP इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की जगह लेगी। इस मिशन के तहत महिलाओं, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लक्षित विशेष प्रोत्साहन जारी रहेंगे। साथ ही, पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे कम विकसित क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को अतिरिक्त लाभ प्रदान कर इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।

पिछली नीतियों से निरंतरता

स्टार्टअप पॉलिसी 2026, 2020 की नीति के सफल पहलुओं को आगे बढ़ाते हुए, पहले स्थापित ₹1,000 करोड़ के कॉर्पस फंड को विस्तारित करती है, जिसमें SIDBI‑प्रबंधित वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) के माध्यम से पूँजी प्रवाह सुनिश्चित किया गया था। 2020 की नीति ने 100 इन्क्यूबेटर, 10,000 स्टार्टअप्स और 5 लाख रुपये तक के प्रोटोटाइप ग्रांट जैसी महत्त्वपूर्ण मापदंड स्थापित किए थे, जिन्हें अब और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 17,000 से अधिक DPIIT‑मान्यताप्राप्त स्टार्टअप्स, आठ यूनिकॉर्न और 70 से अधिक इन्क्यूबेटर हैं। यह आकड़े राज्य को भारत के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में से एक बनाते हैं, विशेषकर नोएडा और लखनऊ जैसे नवाचार हब के कारण। स्टार्टअप पॉलिसी 2026, इस गति को तेज़ करने और गहन‑तकनीकी नवाचार को राज्य की आर्थिक वृद्धि के मुख्य चालक के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।