दिल्ली उच्च न्यायालय ने Google को हिंदवेयर के ट्रेडमार्क के अनधिकृत उपयोग पर ₹30 लाख के नुकसान का आदेश दिया था। कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर 24 जुलाई को सुनवाई की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Google ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की
- हिंदवेयर के ट्रेडमार्क के उपयोग पर ₹30 लाख के नुकसान के आदेश को चुनौती
- फ़ैसले की सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 मई को एकल जज के निर्णय के बाद Google को भारतीय कंपनी हिंदवेयर के ट्रेडमार्क को अपने AdWords प्रोग्राम में कीवर्ड के रूप में उपयोग करने के लिए ₹30 लाख का नुकसान भरने का आदेश दिया था। इस निर्णय को चुनौती देते हुए, Google ने 10 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिससे मामला 24 जुलाई को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा
ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के तहत किसी पंजीकृत चिह्न को प्रतिस्पर्धी विज्ञापनों में उपयोग करना "अनुचित लाभ" माना जाता है। हिंदवेयर ने दावा किया कि Google ने उसके ट्रेडमार्क को प्रतिस्पर्धियों को बेचकर अपने विज्ञापन राजस्व को बढ़ाया, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की संभावना बनी। इस प्रकार का व्यवहार भारतीय न्यायपालिका में पहले भी प्रतिबंधित किया गया है, जहाँ ट्रेडमार्क के स्वामित्व को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षित रखने की दिशा में कई मिसालें स्थापित हुई हैं।
केस की विशिष्टता
इस मामले में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या Google के AdWords में ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में बेचने की प्रक्रिया को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(1) के तहत सुरक्षित हवर प्रदान किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह धारा केवल मध्यस्थों को विशिष्ट शर्तों के तहत सुरक्षा देती है, जबकि ट्रेडमार्क के अनुचित उपयोग को इस सुरक्षा में शामिल नहीं किया गया। इस प्रकार, अदालत ने Google को ट्रेडमार्क के बिना अनुमति के उपयोग करने से रोकते हुए नुकसान भरपाई का आदेश दिया।
संभावित प्रभाव
यदि अपील सफल होती है, तो यह डिजिटल विज्ञापन उद्योग में नई दिशा स्थापित कर सकता है, जिससे बड़े प्लेटफ़ॉर्म को स्थानीय ट्रेडमार्क धारकों की अनुमति के बिना कीवर्ड बेचने से रोकने की संभावनाएँ बढ़ेंगी। दूसरी ओर, यदि अदालत का मूल आदेश बरकरार रहता है, तो यह भारतीय और वैश्विक विज्ञापन एजेंसियों को ट्रेडमार्क उपयोग के लिए अधिक सावधानी बरतने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण और ब्रांड अखंडता दोनों को लाभ होगा।
वकील की दलीलें
सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंहवी ने अपील में कहा कि एकल जज का निर्णय अंतरराष्ट्रीय प्रथा और पूर्व न्यायिक निर्णयों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने यह तर्क दिया कि कीवर्ड विज्ञापन एक वैश्विक मानक है और इसे भारत में भी समान रूप से मान्यता मिलनी चाहिए, बशर्ते उचित अनुमति ली गई हो।
ज्यादातर कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि इस सुनवाई का परिणाम ऑनलाइन विज्ञापन की नियामक ढांचा को पुनः परिभाषित कर सकता है, जिससे न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में डिजिटल मार्केटिंग के नियमों पर पुनर्विचार हो सकता है।