गुज़रात के मोरबी में एक गोदाम में लगी रहस्यमय आग ने 5,500 टन से अधिक मूंगफली को नष्ट कर दिया, जिससे लगभग 42 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च तेल सामग्री और सुरक्षा मानकों की कमी ही बार-बार ऐसी आपदाओं का कारण बनती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मोरबी में फायर ने 5,500 टन से अधिक मूंगफली का भंडार जलाया, अनुमानित नुकसान 42 करोड़ रुपये.
- मूंगफली में 40‑50% तेल होने से आग तेजी से फैलती है; गोदामों में सुरक्षा उपायों की कमी प्रमुख कारण.
- सरकारी जांच जारी, लेकिन अब तक आग के कारण का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला.
गुज़रात के मोरबी में 4 जुलाई को शुरू हुई एक रहस्यमय आग ने अगले पाँच दिनों तक जलती रही, जिससे 5,500 टन से अधिक मूंगफली नष्ट हो गई। यह आग राफलेश्वर गोदाम में स्थित 1.6 लाख गन्नी बैगों को पूरी तरह जलाकर राख में बदल देती है, जो किसानों को लगभग 42 करोड़ रुपये का आर्थिक झटका देती है।
आग की उत्पत्ति और त्वरित प्रतिक्रिया
मोरबी के मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्रसिंह जडेजा के अनुसार, आग गोदाम के दाएँ किनारे से शुरू हुई और एक घंटे में पूरी इमारत को घेर लेती है। जामनागर, राजकोट और वंकनेर सहित चार शहरों की फायर ब्रिगेड ने 100 किमी से दूर से भी जलन को रोकने के प्रयास किए, परन्तु उच्च तेल सामग्री (40‑50% वजन) के कारण आग बुझाना कठिन रहा।
मूंगफली भंडारण की संरचनात्मक समस्याएँ
गुज़रात में अधिकांश मूंगफली गोदाम धातु की बड़ी संरचनाओं में रखे जाते हैं, जिनमें उचित वेंटिलेशन या तापमान नियंत्रण नहीं होता। जब तेल का रिसाव होता है, तो यह सतह पर तेल की परत बनाता है, जो फिर आग को और अधिक तेज़ी से फैलाता है। इस बार भी, जलने के बाद टैंकों में तेल की एक पतली परत देखी गई, जिससे आग की तीव्रता का अनुमान लगाया गया।
आर्थिक प्रभाव और सरकारी जांच
गुजरात कोऑऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GUJCOMASOL) के सीईओ दिनेश सुथर ने बताया कि यह स्टॉक 1,59,581 बैगों में विभाजित था, प्रत्येक बैग का वजन 35 किलोग्राम था। राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन फेडरेशन (NAFED) ने इस उत्पाद का प्रमुख स्वामित्व रखा है, जबकि केंद्रीय एवं गुजरात वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने स्टोरेज की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में पुलिस ने घटना की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक आग के कारण का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का तर्क है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए गोदामों में आधुनिक फायर प्रोटेक्शन सिस्टम, तेल रिसाव नियंत्रण और नियमित निरीक्षण आवश्यक हैं। साथ ही, किसानों को बेहतर बीमा कवरेज और जोखिम प्रबंधन के उपाय प्रदान करना भी आवश्यक होगा, ताकि आर्थिक नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।