न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत की तेज़ आर्थिक उन्नति को ‘अविश्वसनीय’ कहा और दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, शिक्षा व प्रौद्योगिकी में सहयोग को गहरा करने का आह्वान किया। उन्होंने भारत‑न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक नई व्यापारिक गतिकी के रूप में उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत की आर्थिक वृद्धि को लक्सन ने ‘अविश्वसनीय’ कहा
- भोजन, पर्यटन, शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग की संभावना
- दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने का लक्ष्य
ऑकलैंड में आयोजित ‘इंडिया‑न्यूज़ीलैंड: ए विनिंग पार्टनरशिप’ कार्यक्रम में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत की आर्थिक कहानी पर जोर दिया, जिसे उन्होंने ‘अविश्वसनीय’ बताया। यह बयान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो‑दिन की यात्रा के दौरान दिया गया, जिसमें दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं को एक साथ लाकर भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
पृष्ठभूमि और आर्थिक परिवर्तन
1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण से लेकर 2020‑की दशक में डिजिटल अर्थव्यवस्था तक, भारत ने अपनी जीडीपी को वार्षिक औसत 6‑7% तक बढ़ाया है। लक्सन ने उल्लेख किया कि मोदी सरकार ने 250 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, मध्य वर्ग को 440 मिलियन तक बढ़ाया और अगले दशक में इसे 750 मिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। यह परिवर्तन न केवल भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाता है, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए एक नए अवसर का द्वार खोलता है।
व्यापारिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान
लक्सन ने चार प्रमुख क्षेत्रों को सहयोग के लिए प्रमुख माना: भोजन एवं कृषि उत्पाद, पर्यटन अनुभव, शिक्षा संस्थान और प्रौद्योगिकी। उन्होंने कहा कि न्यूज़ीलैंड के उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद, जैसे डेयरी और फल, भारतीय उपभोक्ता वर्ग के लिए अत्यधिक आकर्षक हैं, जबकि भारतीय पर्यटन स्थलों की विविधता न्यूज़ीलैंड के यात्रियों को नई संभावनाएँ प्रदान करती है।
रणनीतिक साझेदारी की दिशा
अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित भारत‑न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को लक्सन ने दो देशों के आर्थिक संबंधों में ‘गहराई और गतिकी’ जोड़ने वाला बताया। यह समझौता न केवल वस्तु‑व्यापार को बढ़ावा देता है, बल्कि निवेश, कौशल गतिशीलता और तकनीकी सहयोग को भी सुविधाजनक बनाता है। लक्सन ने व्यापारियों को भारतीय बाजार को समझने, स्थानीय उपभोक्ता की जरूरतों को पहचानने और उत्पादों को अनुकूलित करने की सलाह दी।
भविष्य की दृष्टि
लक्सन ने ऑस्ट्रियाई न्यूरोलॉजिस्ट विक्टर फ्रैंकल के उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि सरकार, व्यापार और समाज के नेताओं को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच ‘अवसरों की विशाल संभावनाएँ’ साकार हो सकें। उन्होंने सभी उपस्थित व्यापारियों को भारत की ‘सबसे चयनात्मक’ उपभोक्ता वर्ग को समझने और नए बाजारों में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया।
इस कार्यक्रम के बाद, मोदी और लक्सन ने 18 प्रमुख परिणामों पर चर्चा की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाना शामिल है। दोनों देशों की लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को इस साझेदारी की नींव माना गया है।