आंध्र प्रदेश में AgriGold निवेशकों की संघ ने सरकार को विशेष न्यायालय की त्वरित स्थापना और कंपनी के बनामी संपत्तियों की जब्ती की मांग की। उन्होंने छह महीने के भीतर मुआवजा प्रक्रिया को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विशेष न्यायालय को जुलाई के अंत तक सक्रिय किया जाना चाहिए।
  • कंपनी के सभी बनामी संपत्तियों को जब्त कर पारदर्शी नीलाम किया जाना चाहिए।
  • पीड़ितों को छह महीने में मुआवजा देने का वादा पूर्ण किया जाना चाहिए।

विजयवाड़ा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AgriGold ग्राहक एवं एजेंट कल्याण संघ ने आंध्र प्रदेश सरकार से कई प्रमुख मांगें रखी हैं। संघ के मानद अध्यक्ष और सीपीआई राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य मुप्पल्ला नगेश्वरराव ने कहा कि सरकार ने एक कैबिनेट उपसमिति तथा विशेष न्यायालय बनाने का निर्णय लिया है, लेकिन इसे जुलाई के अंत तक कार्यात्मक बनाना अनिवार्य है।

पृष्ठभूमि और विवाद की जड़ें

AgriGold एक कृषि‑संबंधित निवेश योजना थी, जिसने 2010 के बाद से हजारों छोटे बचतकर्ता और किसान को आकर्षित किया। 2023 में कंपनी के वित्तीय लेन‑देन में अनियमितताएँ उजागर हुईं, जिससे कई निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा। इस विवाद के बाद कई राज्य‑स्तरीय जांचें शुरू हुईं, परंतु मुआवजा प्रक्रिया में अनियमितता और देरी बनी रही।

सरकारी पहल और संघ की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडु ने मार्च में अपने भूख हड़ताल के दौरान AgriGold के मामलों को शीघ्र सुलझाने का आश्वासन दिया था। इस आश्वासन को देखते हुए, संघ ने कहा कि कैबिनेट उपसमिति की स्थापना एक सकारात्मक कदम है, परंतु इसे वास्तविक कार्रवाई में बदलना आवश्यक है। उन्होंने विशेष न्यायालय के अलावा, एक समर्पित CID जांच टीम की मांग की है, जो कंपनी के प्रबंधन द्वारा छुपाए गए बनामी संपत्तियों को ट्रैक कर सके।

संपत्ति वसूली और मुआवजा योजना

संघ ने AgriGold प्रबंधन से सभी बनामी संपत्तियों को त्यागने और चल रहे मुकदमों को वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब्त की गई बड़ी जमीनों को छोटे प्लॉट्स में बाँट कर या आवासीय लेआउट में विकसित कर अधिकतम रिटर्न प्राप्त किया जाना चाहिए। 2015 से पहले खरीदी गई जमीनी प्लॉटों के खरीदारों को 25 जुलाई तक बिक्री दस्तावेज़, आधार विवरण और संपर्क जानकारी जिला कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

आगे की कार्यवाही और संभावित प्रभाव

उपसमिति को कंपनी के ग्राहक डेटाबेस तक पहुंच, मंडल‑स्तरीय समितियों की स्थापना और दस्तावेज़ीकरण समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु विस्तृत सिफ़ारिशें प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है। यदि इन कदमों को समय पर लागू किया गया, तो यह न केवल निवेशकों के विश्वास को पुनर्स्थापित करेगा, बल्कि भविष्य में समान वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक मॉडल भी स्थापित करेगा।