कर्नाटक में एक बड़ी धोखाधड़ी जाल ने राष्ट्रीय एवं सहकारी बैंकों को 27‑28 लाख रुपये का नुकसान पहुँचाया। झूठी हॉलमार्क और केवल एसिड टेस्ट पर भरोसा करने वाले बैंकों को ठगी के लिए नकली सोने की जौहरी पेश की गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जाल ने 419 ग्राम नकली सोने से 27‑28 लाख रुपये के ऋण प्राप्त किए
  • बैंकों ने केवल एसिड टेस्ट किया, जिससे घोटाला छिपा रहा
  • कर्नाटक पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जाल को भंग किया

कर्नाटक पुलिस ने एक विस्तृत जाँच के बाद एक बड़े पैमाने पर चल रहे सोने‑आधारित धोखाधड़ी जाल को उजागर किया, जिसने राष्ट्रीय एवं सहकारी बैंकों को कुल 27‑28 लाख रुपये का नुकसान पहुँचाया। इस जाल में शामिल मुख्य आरोपी बी. जे. लोकेश (39) और एच. सुधा (35) को शिवामोगा पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि अन्य जुड़े लोगों की तलाश जारी है।

धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली

जाल के सदस्य ने नकली सोने की जौहरी को 10 % सोने की परत से ढक कर, उन पर झूठे हॉलमार्क लगाए। इन जौहरियों को बैंक में गिरवी रखकर, केवल एसिड टेस्ट पर भरोसा करने वाले बैंकों से लाखों रुपये की लोन राशि प्राप्त की गई। एसिड टेस्ट में सोने की शुद्धता का सटीक पता नहीं चल पाता, जिससे जाँच में खामियों का फायदा उठाया गया।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

शिवामोगा के एसपी निखिल बी ने बताया कि इस जाल में कम से कम 419 ग्राम नकली सोने की जौहरियाँ 27‑28 लाख रुपये के ऋणों के बदले गिरवी रखी गई थीं। पंजाब नेशनल बैंक के एक प्रबंधक ने शिकायत दर्ज करवाई, जिससे पुलिस को इस धोखे का पता चला। जाँच में पता चला कि एस. वाई. रविशंकर, एक सोने के मूल्यांकनकर्ता, और राहुल (26) तथा शरथ (35) ने भी इस जाल में सहयोग किया।

प्रभाव और भविष्य की राह

जाल का पता केवल तब चला जब बैंकों ने लोन‑वसूली के दौरान जौहरियों को नीलामी में पेश किया और मशीन‑टेस्ट करवाई। इस घटना ने बैंकों को यह सीख दी कि केवल एसिड टेस्ट पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बैंकों को सोने की जाँच के लिए अधिक उन्नत मशीनरी और प्रामाणिक हॉलमार्क सत्यापन प्रणाली अपनानी चाहिए।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई

डोड्डापेटे पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और जमानत में रखी गई जौहरियों को जब्ती कर ली है। आरोपियों को आगे की सुनवाई में गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी के तहत कड़ी सजा मिलने की संभावना है।