अंध्र प्रदेश सरकार ने रामायापट्नम, मुलापेटा और मछिलीपट्टनम पोर्ट्स के दूसरे चरण के विस्तार के लिए कुल 1,638.52 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी। इस योजना में 6,248.54 एकड़ भूमि का अधिग्रहण और नई लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना शामिल है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ₹1,638.52 crore का बजट पोर्ट विस्तार के लिए स्वीकृत
- 6,248.54 एकड़ भूमि का अधिग्रहण तय
- नया Nexus Integrated Logistics Park 255 crore निवेश के साथ तैयार
अंध्र प्रदेश सरकार ने पोर्ट-केंद्रित विकास को तेज़ करने के लिए रामायापट्नम, मुलापेटा और मछिलीपट्टनम तीन ग्रीनफ़ील्ड पोर्ट्स के द्वितीय चरण विस्तार हेतु ₹1,638.52 crore की प्रशासनिक स्वीकृति दी। निवेश एवं बुनियादी ढांचा मंत्री बी.सी. जनार्दन रेड्डी ने मंगलवार को घोषणा की, जिसमें कुल 6,248.54 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शामिल है।
विस्तार के विस्तृत आंकड़े
रामायापट्नम पोर्ट (नेल्लोर जिला) के लिए 2,924.45 एकड़ भूमि पर ₹851 crore आवंटित किए गए हैं। मुलापेटा पोर्ट (श्रीकाकुलम जिला) को 1,903.39 एकड़ पर ₹440.52 crore मिले हैं, जिसमें प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए अतिरिक्त प्रावधान हैं। मछिलीपट्टनम पोर्ट (कृष्णा जिला) को 1,420.70 एकड़ पर ₹347 crore की मंजूरी मिली।
नवीन लॉजिस्टिक पार्क की पहल
त्रिपुती जिले के सत्यवेदु मंडल में स्थित छोटी ईटिवाकम में 63.01 एकड़ भूमि को Nexus Integrated Logistics Park के लिए आवंटित किया गया। यह परियोजना अनुमानित ₹255 crore के निवेश के साथ लगभग 1,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी, जिससे राज्य को एक आधुनिक लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
आर्थिक व रणनीतिक प्रभाव
इन पोर्टों का विस्तार माल संभाल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा, जिससे समुद्री व्यापार में अंध्र प्रदेश का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई कंटेनर क्षमता और उन्नत टर्मिनल सुविधाएं राज्य के औद्योगिक zones, विशेषकर तेल, रसायन और कृषि-उत्पादों के लिए निर्यात‑आधारित उत्पादन को सुदृढ़ करेंगी। साथ ही, लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण आपूर्ति श्रृंखला को सुगम बनाकर निवेशकों को आकर्षित करेगा।
भविष्य की दिशा
पोर्ट विस्तार और लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में यह बड़ी निवेश राशि अंध्र प्रदेश को भारत के प्रमुख समुद्री-आधारित आर्थिक केंद्रों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और स्थानीय समुदायों के पुनर्वास को सावधानीपूर्वक संभालना आवश्यक रहेगा, ताकि विकास की गति सामाजिक समरसता के साथ बनी रहे।