अमेरिका-ईरान संघर्ष और बढ़ते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व का रुख सोने की दिशा तय करेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भू-राजनीतिक तनाव के चलते स्पॉट गोल्ड गिरकर $4013 प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।
  • स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध से कच्चे तेल की कीमतों में 4% से अधिक का उछाल आया।
  • फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त बयानों और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड ने सोने पर दबाव बढ़ाया है।
  • चीन और पोलैंड जैसे केंद्रीय बैंक रणनीतिक रूप से सोने की खरीदारी जारी रखे हुए हैं।

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें इस समय पूरी तरह से भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) की मौद्रिक नीतियों के इर्द-गिर्द घूम रही हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में उतार-चढ़ाव देखा गया है। सोमवार को स्पॉट गोल्ड भारी दबाव में आ गया और यह 2.6% की बड़ी गिरावट के साथ $4013 प्रति औंस पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल और अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है।

भू-राजनीति और कच्चे तेल का प्रभाव

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी हमलों और जवाबी हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद करने के दावों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से आने-जाने वाले जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क लगाने की घोषणा की है। इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल वायदा में 4% से अधिक की तेजी आई है। आमतौर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ता है, जो सोने के लिए सकारात्मक होना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने सोने की चमक को फीका कर दिया है।

फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ट्रेजरी यील्ड

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों ने बाजार में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका दिया है। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने संकेत दिया है कि यदि मुख्य मुद्रास्फीति (Core Inflation) ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो निकट भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। इस बयान के बाद दो वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.25% और दस वर्षीय यील्ड 4.60% पर पहुंच गई, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है। बढ़ती यील्ड के कारण बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने को होल्ड करने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है, जिससे निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं।

केंद्रीय बैंकों की रणनीतिक खरीदारी

भले ही अल्पकालिक निवेशक सोने से दूरी बना रहे हों और ईटीएफ (ETF) होल्डिंग्स में गिरावट देखी जा रही हो, लेकिन दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने की लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने जून में अपने भंडार में 15 टन सोना जोड़ा, जो लगातार 20वें महीने इसकी खरीदारी को दर्शाता है। इसी तरह, पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने भी 2026 की पहली छमाही में 82 टन सोने का संचय किया है। केंद्रीय बैंकों की यह रणनीतिक खरीदारी सोने की कीमतों को एक मजबूत निचला स्तर (Floor Price) प्रदान कर रही है, जिससे बड़ी गिरावट की संभावना कम हो जाती है।

आगे की राह और बाजार का दृष्टिकोण

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें नए फेड चेयरमैन वॉर्श की अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष होने वाली गवाही और आगामी अमेरिकी सीपीआई (CPI) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी होंगी। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़ों में राहत मिलती है, तो सोने को कुछ सहारा मिल सकता है। हालांकि, जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और फेड का रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक सोने की कीमतों में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।