जल शक्ति मंत्रालय ने तेलंगाना सरकार को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत जारी ₹36.34 करोड़ को 7% ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया है। ऑडिट में पाया गया कि यह राशि 11 परियोजनाओं में उपयोग नहीं हुई और अन्य परियोजनाओं में भी आवंटित नहीं की गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) ने तेलंगाना सरकार को ₹36.34 करोड़ वापस करने को कहा है।
- इस राशि पर 7% वार्षिक दर से ₹17.88 करोड़ का ब्याज भी देना होगा।
- ऑडिट में पाया गया कि फंड का उपयोग न तो मूल 11 परियोजनाओं में हुआ और न ही अन्य 9 परियोजनाओं में।
- किसानों द्वारा भूमि देने में अनिच्छा के कारण कई परियोजनाएं अधर में लटकी हैं।
नई दिल्ली/हैदराबाद: जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) के निगरानी और मूल्यांकन निदेशालय ने तेलंगाना सरकार के सिंचाई विभाग को एक कड़ा निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत जारी की गई केंद्रीय सहायता राशि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए जिसके लिए उसे स्वीकृत किया गया था।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना सरकार के पास ₹36.34 करोड़ की राशि लंबित है। यह राशि 2017-18 और 2018-19 के दौरान 11 सिंचाई परियोजनाओं के लिए जारी की गई थी। हालांकि, तेलंगाना सरकार ने जुलाई 2023 में केंद्र को सूचित किया था कि किसानों द्वारा भूमि देने में अनिच्छा के कारण इन परियोजनाओं में कोई भौतिक प्रगति नहीं हो सकी है। राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं को रद्द करने और इस राशि को 9 अन्य परियोजनाओं में समायोजित करने का अनुरोध किया था, लेकिन ऑडिट में पाया गया कि यह राशि उन 9 परियोजनाओं में भी उपयोग नहीं की गई है।
Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय अनुशासन और परियोजना प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है। जब केंद्रीय सहायता राशि का उपयोग समय पर नहीं होता, तो यह न केवल सरकारी खजाने पर बोझ डालता है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास को भी बाधित करता है।
आम जनता के लिए इसके मायने यह हैं कि सिंचाई परियोजनाओं में देरी का सीधा असर कृषि उत्पादकता और किसानों की आय पर पड़ता है। ब्याज के साथ राशि वापस करने का आदेश राज्य के बजट पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डालेगा, जिससे अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए धन की कमी हो सकती है।
वित्तीय अनुशासन की कमी और भूमि अधिग्रहण में विफलता सीधे तौर पर कृषि विकास की गति को धीमा कर देती है।
| विवरण | मूल योजना (11 परियोजनाएं) | वर्तमान स्थिति (9 परियोजनाएं) |
|---|---|---|
| स्वीकृत सहायता | ₹722.61 करोड़ | समायोजन का अनुरोध किया गया |
| उपयोग की गई राशि | ₹36.34 करोड़ | उपयोग नहीं की गई (लंबित) |
| ब्याज दर (दावा) | N/A | 7% प्रति वर्ष |
तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (Historical Background): प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की शुरुआत 2015 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य 'हर खेत को पानी' सुनिश्चित करना और सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) तकनीकों को बढ़ावा देना है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच एक सहयोगात्मक मॉडल पर काम करती है।
Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: तेलंगाना सरकार को ब्याज क्यों देना पड़ रहा है?
उत्तर: क्योंकि केंद्रीय धन का उपयोग उन परियोजनाओं के लिए नहीं किया गया जिनके लिए उसे स्वीकृत किया गया था, जिससे यह नियमों के विरुद्ध 'अनयूज्ड फंड' बन गया।
प्रश्न 2: परियोजनाओं में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, किसान निर्माण कार्यों के लिए अपनी भूमि देने को तैयार नहीं हैं, जिससे भौतिक प्रगति रुक गई है।