प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 'समुद्र मंथन' मिशन का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्र के नीचे छिपे तेल और गैस भंडारों की खोज करना है। यह मिशन वैश्विक ऊर्जा संकटों के बीच भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की एक बड़ी पहल है।

मुख्य बातें

  • 'समुद्र मंथन' भारत की राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) है।
  • केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
  • इसका लक्ष्य भारत की तेल आयात निर्भरता को कम करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना है।
  • यह योजना 2030-31 तक लागू की जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के एक नए और छिपे हुए मोर्चे का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय, अपने समुद्री क्षेत्रों की गहराई में छिपे संसाधनों को खोजने की दिशा में बढ़ रहा है।

पीएम मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अतीत में, भारत के लगभग 99 प्रतिशत अपतटीय क्षेत्रों को 'नो-गो ज़ोन' (जहां अन्वेषण वर्जित था) घोषित किया गया था। हालांकि, अब सरकार ने इन क्षेत्रों को खोल दिया है और नए ऊर्जा भंडारों की खोज के लिए 'समुद्र मंथन' नामक एक महत्वाकांक्षी मिशन की शुरुआत की है।

समुद्र मंथन क्या है?

'समुद्र मंथन' वास्तव में भारत की राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना है। इस परियोजना के तहत समुद्र के तल के नीचे चट्टानों का मानचित्रण करने के लिए सिस्मिक सर्वेक्षण (Seismic Surveys) किए जाएंगे, साथ ही गहरे पानी और अल्ट्रा-डीपवाटर ड्रिलिंग की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य भारत के अपतटीय बेसिनों से तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन करना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88.5% आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण, भारत की ऊर्जा आपूर्ति हमेशा जोखिम में रहती है। 'समुद्र मंथन' इस जोखिम को कम करने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का एक रणनीतिक कदम है।

समुद्र मंथन केवल एक ड्रिलिंग प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा संप्रभुता को सुरक्षित करने का एक निर्णायक कदम है।

इस योजना के माध्यम से सरकार को हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक का इजाफा होने की उम्मीद है। यह न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से होने वाले आर्थिक झटकों से भी देश की रक्षा करेगा।

क्या आप जानते हैं?: भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे स्थित तेल और गैस के भंडारों से पूरा किया जा सकता है, जो वर्तमान में पूरी तरह से खोजे नहीं गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'समुद्र मंथन' मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज करना और उत्पादन बढ़ाना है।

2. इस परियोजना के लिए कितना बजट निर्धारित किया गया है?
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय (Outlay) मंजूर किया है।