प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा है कि भारत को अब वैश्विक स्तर पर खुद को साबित करने के लिए बाहरी देशों की मंजूरी की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारत की प्रति व्यक्ति आय और भविष्य की आर्थिक लचीलापन (resilience) पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

मुख्य बातें

  • भारत को अब विदेशी देशों से प्रशंसा या मान्यता की तलाश करने की आवश्यकता नहीं है।
  • संजीव सान्याल के अनुसार, भारत की असली चुनौती सही नीति चुनना नहीं, बल्कि अनिश्चित दुनिया में जीवित रहने के लिए लचीलापन बनाना है।
  • प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी भी एक गरीब राष्ट्र की श्रेणी में आता है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। NDTV के साथ एक विशेष बातचीत में, सान्याल ने स्पष्ट किया कि भारत को अपनी नीतियों के लिए अब पश्चिमी देशों या वैश्विक संस्थाओं की 'वैधता' या 'मान्यता' की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।

सान्याल ने जोर देकर कहा कि भारत का सबसे बड़ा लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली विकसित करना होना चाहिए जो वैश्विक अस्थिरता के बीच भी अडिग रह सके। उनके अनुसार, आज की दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, जहाँ पुरानी नीतियाँ और नियम काम नहीं करेंगे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, सान्याल का यह बयान भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत है। भारत अब वैश्विक मंच पर केवल एक अनुयायी (follower) के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र निर्णय लेने वाली शक्ति के रूप में उभर रहा है। यह मानसिकता भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने में मदद कर सकती है।

भारत की असली चुनौती सही नीति का चयन करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी लचीली व्यवस्था बनाना है जो अनिश्चितताओं का सामना कर सके।

हालांकि, उन्होंने एक कड़वी सच्चाई भी सामने रखी। सान्याल ने स्वीकार किया कि प्रति व्यक्ति आय (per capita income) के मामले में भारत अभी भी एक गरीब देश है। यह दर्शाता है कि जहाँ हमें वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास दिखाना है, वहीं घरेलू स्तर पर गरीबी और आय असमानता जैसी बुनियादी चुनौतियों से लड़ना भी अनिवार्य है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय तक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और संस्थाओं (जैसे IMF और World Bank) के दिशानिर्देशों के अनुसार अपनी अर्थव्यवस्था को ढालने का प्रयास करता रहा है। लेकिन पिछले दशक में, भारत ने अपनी घरेलू जरूरतों के आधार पर 'आत्मनिर्भरता' की ओर कदम बढ़ाए हैं।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह अभी भी मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में संघर्ष कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: संजीव सान्याल कौन हैं?
उत्तर: संजीव सान्याल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक प्रमुख सदस्य हैं।

प्रश्न 2: सान्याल ने भारत की मुख्य चुनौती क्या बताई?
उत्तर: उन्होंने कहा कि चुनौती केवल नीति बनाना नहीं, बल्कि अनिश्चित दुनिया में जीवित रहने के लिए लचीलापन (flexibility) विकसित करना है।