पहले मॉनसून की तेज़ बारिश ने गुड़गांव की सड़कों को जलमग्न कर दिया, जिससे कई स्कूल बसें फँस गईं। बच्चों को सामान्य समय के बजाय चार घंटे तक स्कूल में ही रहना पड़ा, जिससे भूख, प्यास और मानसिक तनाव बढ़ा।

गुड़गांव में इस सप्ताह आए पहली बड़ी मॉनसून की बाढ़ ने शहर के शहरी बुनियादी ढाँचे को गंभीर रूप से प्रभावित किया। सड़कों पर जल जमा हो जाने के कारण ट्रैफिक पूरी तरह रुक गया, जिससे स्कूल बसों सहित कई सार्वजनिक वाहनों की चलना-फिरना असंभव हो गया।

स्कूल बसों में बच्चों का चार घंटे तक फँसना

सुनसिटी स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को कम से कम पाँच बसें देर से पहुँचीं। सामान्य रूप से 10-15 किमी के दायरे में चलने वाली ये बसें, बारिश के कारण 5‑5.30 बजे तक ही स्कूल पहुंचा पाईं। कई बच्चों को 3.30 बजे घर पहुँचने की उम्मीद थी, परंतु उन्हें 7 बजे या उसके बाद ही अपने घर पहुँचना पड़ा।

परिवारों की चिंताएँ और तत्काल उपाय

सोहना रोड के निवासी रिचा सारीन ने बताया कि उनके बच्चों को 5 बजे घर पहुँचने पर अत्यधिक थकान, भूख और शौचालय की आवश्यकता महसूस हुई। इसी तरह, सेक्टर 45 के डीपीएस और सेक्टर 41 के शिक्षांतार स्कूल के अभिभावकों ने चार घंटे की देरी की शिकायत की। एक अभिभाविका, शिल्पी वर्मा ने कहा, “मेरी बेटी दो घंटे देर से घर पहुँची और अत्यंत थकी हुई थी।”

आपातकालीन योजना की कमी पर सवाल

निरवाना कंट्री की निवासी रुचिका सेठी ने कहा, “शहरी बाढ़ गुड़गांव में नई नहीं है; यह एक पूर्वानुमेय आपात स्थिति है। हमें स्कूलों और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल को सक्रिय रखें और पानी व चिकित्सा सहायता की त्वरित व्यवस्था करें।” उन्होंने यह भी उजागर किया कि वीआईपी काफिले को जल्दी से जल्दी मार्ग दिया जाता है, जबकि स्कूल बसों को समान प्राथमिकता नहीं मिलती।

भविष्य में संभावित सुधार

शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे मौसमी आपदाओं के लिए विशेष रूप से स्कूल ट्रांसपोर्ट के वैकल्पिक मार्ग और त्वरित प्रतिक्रिया टीम स्थापित करें। साथ ही, स्कूलों को चाहिए कि वे आपातकालीन जल आपूर्ति, स्नैक्स और शौचालय सुविधाओं की व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित करें, ताकि बच्चों को अनावश्यक तनाव का सामना न करना पड़े।

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि केवल बुनियादी ढाँचे की मजबूती नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारी और त्वरित कार्यान्वयन भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।