हैदराबाद में सरकारी डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन (ऑटोनॉमस) में प्रोजेक्ट विद्या 3.0 और इमर्जिंग वीमेन लीडर्स प्रोग्राम (EWLP) का शुभारम्भ हुआ। विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन, यूएनआईसीएफ इंडिया और कॉलेज प्रिंसिपल के साथ मिलकर इस पहल को महिलाओं के नेतृत्व कौशल, संवाद क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी के विकास के लिए एक मंच बनाते हैं।

हैदराबाद—तेलंगाना की राजधानी में 9 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारम्भ हुआ, जिसमें प्रोजेक्ट विद्या 3.0 और इमर्जिंग वीमेन लीडर्स प्रोग्राम (EWLP) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शैक्षणिक उपलब्धियों से परे युवा महिलाओं को नेतृत्व, संचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के कौशल से सुसज्जित करना है। विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने उद्घाटन समारोह में कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल छात्राओं को आत्मविश्वास देते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य के निर्णय‑निर्माता बनाते हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य और संरचना

EWLP एक वर्ष की संरचित नेतृत्व विकास पहल है, जो नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और उद्यमशीलता को मुख्य स्तंभ बनाती है। यह द गुड टॉक फैक्टरी फाउंडेशन (TGTF) द्वारा यूनिस्लिंक के CSR सहयोग से कार्यान्वित किया गया है, जिसका लक्ष्य शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कार्यस्थल की तैयारी से जोड़ना है। कुल 55 अंतिम वर्ष की छात्राओं को 15 सत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसमें नेतृत्व, पेशेवर शिष्टाचार, संगठनात्मक कौशल और नैतिकता जैसे विषय शामिल हैं।

मुख्य भागीदार और समर्थन

समारोह में ज़ेलालेम बिर्हानु टफ़ेसे, UNICEF इंडिया के फील्ड ऑफिस के प्रमुख, ने भी भाग लिया। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा और नेतृत्व विकास में निवेश के दीर्घकालिक सामाजिक‑आर्थिक लाभों पर प्रकाश डाला, यह कहा कि जीवन कौशल और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने वाले कार्यक्रम समावेशी और सतत विकास के लिए अनिवार्य हैं। कॉलेज प्रिंसिपल के. पद्मावती ने कहा कि संस्थान शैक्षणिक उत्कृष्टता को नेतृत्व, मूल्य और व्यक्तित्व विकास के साथ एकीकृत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भर्ती, प्रशिक्षण और अपेक्षित परिणाम

छात्राओं का चयन उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक सहभागिता के आधार पर किया गया। प्रशिक्षण के दौरान केस‑स्टडी, रोल‑प्ले, उद्यमशीलता कार्यशालाएँ और सामुदायिक सेवा प्रोजेक्ट्स को शामिल किया जाएगा, जिससे छात्राएँ वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार होंगी। प्रोजेक्ट विद्या 3.0 का लक्ष्य न केवल प्रतिभागियों को नौकरी‑तैयार बनाना है, बल्कि उन्हें भविष्य की नीति‑निर्मात्री, सामाजिक उद्यमी और सार्वजनिक प्रबंधन में अग्रणी बनाना है।

भविष्य की दिशा और राष्ट्रीय महत्व

भारत में महिलाओं के कार्यशक्ति भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई राज्य‑स्तरीय पहलें चल रही हैं, लेकिन नेतृत्व‑केन्द्रित प्रशिक्षण अभी भी सीमित है। प्रोजेक्ट विद्या 3.0 इस अंतर को पाटते हुए तेलंगाना को महिलाओं के सशक्तिकरण के मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है। यदि इस तरह के कार्यक्रम सफल होते हैं, तो उन्हें अन्य राज्य‑स्तर के शैक्षणिक संस्थानों में दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर लैंगिक समानता के लक्ष्य को तेज़ी से हासिल किया जा सकेगा।