यदि ‘एक्सपर्ट माँ’ को एक औपचारिक योग्यता माना जाए तो कौन‑से करियर विकल्प खुलेंगे? इस विचार ने भारत के महिला स्नातकों और नीति निर्माताओं के बीच तीव्र बहस छेड़ दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ‘एक्सपर्ट माँ’ कोई आधिकारिक प्रमाणपत्र नहीं, फिर भी यह सामाजिक मानदंड बन गया है।
- मातृत्व में अर्जित कौशल—बजटिंग, संकट प्रबंधन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता—कॉर्पोरेट नेतृत्व के बराबर हैं।
- शिक्षा में वृद्धि के बावजूद महिला श्रम शक्ति भागीदारी में बड़ी असमानता बनी हुई है।
भारत में हर व्यावसायिक योग्यता के साथ पाठ्यक्रम, परीक्षा और प्रमाणपत्र जुड़ा होता है। ‘एक्सपर्ट माँ’ मात्र एक शब्द है, जिसके पीछे कोई औपचारिक syllabus नहीं, कोई परीक्षक नहीं और न ही कोई प्रमाणपत्र है। फिर भी, यह शब्द कई महिलाओं के करियर पथ को प्रभावित करता है, विशेषकर जब उत्तर प्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने स्नातक महिलाओं को “पहले विशेषज्ञ माँ बनें, फिर आईएएस अधिकारी” कहकर सलाह दी।
पृष्ठभूमि और सामाजिक मानदंड
यह बयान UPSC जैसी कठोर परीक्षा के विपरीत है, जहाँ स्पष्ट पात्रता, सार्वजनिक syllabus और विश्वसनीय मूल्यांकन होते हैं। ‘एक्सपर्ट माँ’ का मूल्यांकन समाज ही करता है—परिवार, पड़ोसी, सोशल मीडिया और व्यापक जनमत। प्रश्न यह उठता है कि क्या यह मानदंड मातृत्व को एक पेशेवर कौशल के रूप में मान्यता देता है या फिर महिलाओं को दोहरी अपेक्षाओं के जाल में फँसाता है।
शिक्षा में प्रगति, लेकिन कार्यबल में भागीदारी गिरावट
आखिरी AISHE 2023‑24 रिपोर्ट के अनुसार, सातवीं लगातार वर्ष महिलाओं ने स्नातक स्तर पर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। महिला GER 31.2% है, जबकि पुरुष 28.9%। फिर भी, Periodic Labour Force Survey के अनुसार, मई 2026 में महिला श्रम भागीदारी दर केवल 32.8% रही, ग्रामीण‑शहरी अंतर के साथ 36.7% बनाम 24.8%। यह अंतर यह दर्शाता है कि शिक्षा के बावजूद, कार्यस्थल में मातृत्व को अक्सर “करियर गैप” के रूप में देखा जाता है, न कि एक मूल्यवान कौशल के रूप में।
मातृत्व के कौशल: अनदेखी नेतृत्व क्षमता
बजट बनाना, समय‑सारिणी तैयार करना, संघर्ष समाधान और संकट प्रबंधन—इनमें से कई क्षमताएँ प्रत्यक्ष रूप से कॉरपोरेट नेतृत्व के मानदंडों से मेल खाती हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने इसे “मदरहुड एम्प्लॉयमेंट पेनाल्टी” कहा है, जहाँ माताओं को अक्सर रोजगार दर में गिरावट और करियर प्रगति में बाधा का सामना करना पड़ता है, जबकि पिता को “फ़ादरहूड प्रीमियम” मिलता है।
भविष्य की राह
यदि नियोक्ता वास्तव में बहु‑कार्यकुशलता, तनाव‑प्रबंधन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को मूल्यवान मानते हैं, तो उन्हें मातृत्व‑अवधि को “ट्रांसफ़रेबल एक्सपीरियंस” के रूप में पुनः परिभाषित करना चाहिए। तभी ‘एक्सपर्ट माँ’ का शब्द केवल सामाजिक प्रशंसा नहीं, बल्कि वास्तविक नौकरी योग्यताओं में बदल सकेगा।