केरल हाई कोर्ट ने तीन सीबीएसई कक्षा 12 के छात्रों को केसम पोर्टल पर पुनर्मूल्यांकन अंक अपलोड करने की अनुमति दी, लेकिन उनका प्रवेश केवल द्वितीय आवंटन दौर से माना जाएगा। यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में मेरिट‑आधारित प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करता है।

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को तीन सीबीएसई कक्षा 12 के छात्रों—जिनमें से एक यूएई से है—के लिए केसम (केरल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मेडिकल) पोर्टल पर पुनर्मूल्यांकन किए गए अंक अपलोड करने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इन छात्रों का प्रवेश केवल द्वितीय आवंटन दौर से ही मान्य होगा, जिससे पहले आवंटन में किसी भी तरह का व्यवधान नहीं होगा।

पृष्ठभूमि

इन छात्रों ने कोर्ट में याचिका दायर की, यह तर्क देते हुए कि यदि उनका पुनर्मूल्यांकन अंक ध्यान में लिया जाता तो उनका रैंक उल्लेखनीय रूप से सुधार जाता। उनका कहना था कि सीबीएसई द्वारा पुनर्मूल्यांकन परिणाम केसम रैंक सूची के प्रकाशित होने (27 जून) के बाद जारी किए गए, जिससे उन्हें अनुचित नुकसान हुआ।

केसम रैंक सूची में बदलाव

केरल राज्य सरकार ने पहले ही रैंक सूची की प्रकाशन तिथि दो बार बदल कर सीबीएसई छात्रों को समायोजित करने की कोशिश की थी, और पुनर्मूल्यांकन अंक अपलोड करने की अंतिम तिथि 23 जून निर्धारित की थी। सरकार का तर्क था कि 27 जून को अंतिम रैंक सूची प्रकाशित हो चुकी है और इसे पुनः संशोधित नहीं किया जा सकता, क्योंकि 8 जुलाई से आवंटन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

उच्च न्यायालय का निर्णय

कोर्ट ने सरकार के तर्कों को अस्वीकार कर कहा कि यह मामला "निस्संदेह असाधारण" है और "असाधारण परिस्थितियों के लिए असाधारण उपाय आवश्यक" हैं। कोर्ट ने सीबीएसई के उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में तकनीकी खामियों—जैसे उत्तर पुस्तिकाओं का अदला‑बदली, धुंधली स्कैनिंग—को उजागर किया, और कहा कि ये त्रुटियां उम्मीदवारों की गलती नहीं हैं।

आगामी कदम

कोर्ट ने केरल प्रवेश परीक्षा आयुक्त को निर्देश दिया कि वे 13 जुलाई दोपहर 12:30 बजे तक पुनर्मूल्यांकित अंक अपलोड किए जाने पर उन्हें स्वीकारें और द्वितीय आवंटन से पहले रैंक सूची को पुनः तैयार करें। अन्य किसी भी उम्मीदवार के पुनर्मूल्यांकन अंक को अपलोड करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और प्रथम आवंटन में इन छात्रों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह निर्णय न केवल प्रभावित छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि मेरिट‑आधारित प्रवेश प्रणाली की विश्वसनीयता को भी सुदृढ़ करता है। भविष्य में समान तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए बोर्ड और राज्य स्तर पर मूल्यांकन प्रक्रियाओं की पुनरावृत्ति आवश्यक होगी।