आख़िरी All India Survey on Higher Education (AISHE) 2023‑24 ने दिखाया कि कुल प्रवेश दर (GER) 2014‑15 के 23.7 % से बढ़कर 30 % हो गई है। इस वृद्धि में महिलाओं ने विशेष रूप से तेज़ी से भाग लेकर लैंगिक असमानता को घटाया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- GER 2014‑15 से 2023‑24 के बीच 6.3 % अंक बढ़ा
- महिला छात्रा की भागीदारी दर में उल्लेखनीय उछाल
- उच्च शिक्षा में लैंगिक अंतर को कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत
All India Survey on Higher Education (AISHE) 2023‑24 की नवीनतम रिपोर्ट ने भारत में कुल प्रवेश दर (Gross Enrolment Ratio – GER) में सात‑साल की निरंतर उन्नति को रेखांकित किया। 2014‑15 में 23.7 % के स्तर से यह 2023‑24 में 30 % तक पहुंच गया, अर्थात् एक दशक में 6.3 % अंक की वृद्धि। यह आंकड़ा न केवल उच्च शिक्षा की पहुंच में सुधार दर्शाता है, बल्कि सामाजिक‑आर्थिक प्रगति का भी संकेत है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार, इस कुल वृद्धि का अधिकांश हिस्सा महिला छात्रों के प्रवेश में तेज़ी से आया है। पिछले दशक में महिला GER में औसत 0.9 % वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि पुरुषों की वृद्धि दर 0.7 % रही। इस प्रवृत्ति ने लैंगिक अंतर को 2014‑15 में लगभग 5 % से घटाकर 2023‑24 में 2 % से भी कम कर दिया है। विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (STEM) क्षेत्रों में महिलाओं की प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय सुधार देखे जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि और नीति प्रभाव
भारत सरकार ने पिछले वर्षों में कई पहलें चलाई हैं, जैसे कि छात्रवृत्ति कार्यक्रम, कॉलेजों में सुरक्षित कैंपस, और डिजिटल शिक्षा का विस्तार। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP‑2020) ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने पर बल दिया है। इन नीतियों का समन्वित प्रभाव, साथ ही सामाजिक मान्यताओं में धीरे‑धीरे बदलाव, ने इस सकारात्मक प्रवृत्ति को उत्प्रेरित किया है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि वर्तमान गति जारी रही, तो 2030 तक GER 35 % से ऊपर पहुंचने की संभावना है, और महिलाओं की भागीदारी दर 2024 के स्तर से 5‑6 % अंक अधिक हो सकती है। यह न केवल श्रम बाजार में कौशल पूल को समृद्ध करेगा, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। हालांकि, ग्रामीण‑शहरी अंतर, सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच की चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, जिन्हें नीति निर्माताओं को निरंतर संबोधित करना होगा।
निष्कर्ष
GER में स्थिर वृद्धि और महिलाओं की अग्रसर भागीदारी भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक परिवर्तनकारी मोड़ दर्शाती है। इस परिवर्तन को स्थायी बनाने के लिए निरंतर निवेश, समावेशी नीतियाँ और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।