कैलाबुरागी के दंडोटी गांव में मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूल में शाम के भोजन के बाद 50 छात्रों को तीव्र खाद्य विषाक्तता हुई। प्राथमिक जांच में रसोई की गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर चूक का पता चला, जिससे प्रधानाचार्य और वॉर्डन को निलंबित किया गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- दंडोटी स्कूल में 50 छात्र भोजन के बाद बीमार पड़े
- प्रधानाचार्य और वॉर्डन को निलंबित किया गया
- प्राथमिक जांच में अधपका चावल और रसोई में लापरवाही का संकेत
कल शाम लगभग 7.30 बजे, कैलाबुरागी जिले के चिट्टापुर तालुका, दंडोटी गांव स्थित मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूल में 50 छात्रों ने तीव्र उल्टी, पेट दर्द और मतली जैसी लक्षण दिखाए। यह सब स्कूल के डाइनिंग हॉल में परोसे गए रात के खाने के तुरंत बाद हुआ, जिससे माता‑पिता में घबराहट के साथ साथ प्रशासनिक प्रतिक्रिया तेज़ी से शुरू हुई।
तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने पर जिला स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें उपमुख्य आयुक्त इकराम शरिफ़, जिला पुलिस का सुपरिंटेंडेंट, जिला स्वास्थ्य अधिकारी और ज़िला पंचायत के सीईओ शामिल थे, रात 1 बजे तक घटना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने स्थानीय सरकारी अस्पतालों में प्रभावित छात्रों की निगरानी की और आपातकालीन उपचार सुनिश्चित किया। जांच के बाद 39 छात्रों को भर्ती किया गया, लेकिन सभी ने जल्द ही पूरी तरह ठीक होते हुए डिस्चार्ज कर लिया।
जाँच के प्रारम्भिक निष्कर्ष
प्राथमिक जांच से पता चला कि स्कूल की रसोई में गुणवत्ता नियंत्रण की कड़ी कमी थी। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि रात के खाने में परोसा गया चावल अधपका था, जिससे छात्रों में व्यापक पाचन संबंधी समस्या उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य की सुरक्षा उपाय
कर्नाटक सरकार ने सभी राज्य होस्टलों में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु त्वरित और कठोर निरीक्षण का आदेश दिया है। साथ ही, अल्पकालिक कदम के रूप में, स्कूल के आउटसोर्स्ड किचन स्टाफ के अनुबंध को समाप्त कर प्रशिक्षित और भरोसेमंद कर्मियों को नियुक्त करने का प्रस्ताव किया गया है।
समुदाय और अभिभावकों के प्रति आश्वासन
जिला प्रशासन ने अभिभावकों को अप्रामाणिक अफवाहों से बचने का आग्रह किया और यह स्पष्ट किया कि छात्रों की भलाई प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी और नियमित खाद्य सुरक्षा ऑडिट लागू किए जाएंगे।