पिछले दशक में भारत ने 39,517 से 58,134 विदेशी छात्रों को आकर्षित किया, जिससे enrolment में 47% की वृद्धि हुई। नेपाल ने 24.1% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्रोत देश की स्थिति बरकरार रखी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विदेशी छात्र enrolment में 47% की वृद्धि
- नेपाल 24.1% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख स्रोत
- कर्नाटक, पंजाब, महाराष्ट्र प्रमुख गंतव्य राज्य
भारत ने पिछले दस वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्र आकर्षण में उल्लेखनीय छलांग लगाई है। शिक्षा विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2023‑24 शैक्षणिक वर्ष में 58,134 विदेशी छात्र 173 देशों से भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला ले रहे हैं, जबकि 2013‑14 में यह संख्या 39,517 थी। यह 18,617 छात्रों की वृद्धि लगभग 47% के बराबर है, और प्रतिनिधित्व करने वाले देशों की संख्या 158 से बढ़कर 173 हो गई।
नेपाली छात्रों की निरंतर प्रधानता
सभी विदेशी छात्रों में नेपाल से 24.1% की हिस्सेदारी है, जो 2013‑14 के 21% से बढ़ी है। इस कारण नेपाल दो दशकों से भारत का सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ है। नेपालियों की यह निरंतरता दो‑तीन प्रमुख कारणों से समझाई जा सकती है: भारत‑नेपाल के मुक्त सीमा समझौते, तुलनात्मक रूप से सस्ती शिक्षा, और भारतीय विश्वविद्यालयों की मान्यता।
स्रोत देशों का बदलता परिदृश्य
दशक के शुरुआती दौर में अफगानिस्तान (8%), भूटान (7%), मलेशिया (6%), सूडान (5%) और इराक (5%) प्रमुख थे। 2023‑24 में यह क्रम बदलकर संयुक्त अरब अमीरात (7%), संयुक्त राज्य अमेरिका (5.9%), बांग्लादेश (5.9%), नाइजीरिया (5.5%) और ज़िम्बाब्वे (4%) रहा। लैबनान, बुरुंडी, मंगोलिया, मैक्सिको, कज़ाखस्तान, बेलारूस और चिली जैसे विविध देशों के छात्र भी अब भारत में पढ़ रहे हैं, जिससे भौगोलिक विविधता में स्पष्ट विस्तार दिखता है।
शैक्षणिक स्तर और राज्यीय वितरण
विदेशी छात्रों की 73.6% enrolment अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में है, जो दर्शाता है कि भारत अभी भी बैचलर डिग्री के लिए एक आकर्षक गंतव्य है। राज्य स्तर पर कर्नाटक ने 7,914 छात्रों के साथ सबसे अधिक आकर्षित किया, उसके बाद पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु आए। यह प्रवृत्ति भारत के तकनीकी और इंजीनियरिंग संस्थानों की विश्वसनीयता को रेखांकित करती है।
‘Study in India’ पहल की भूमिका
2018 में शुरू की गई ‘Study in India’ योजना ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2019‑20 के बाद से विदेशी छात्र enrolment में लगातार बढ़ोतरी देखी गई, 48,898 से 58,134 तक पहुँचते हुए। यह न केवल भारत की शिक्षा निर्यात क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक विनिमय को भी सुदृढ़ करता है।